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Workshop: आखिर कृषि के क्षेत्र में क्यों अव्वल है छिंदवाड़ा, जानिए वजह

- कलेक्टर ने कहा कि छिंदवाड़ा जिले के किसान अत्यंत नवाचारी - टिकाऊ खेती से जहर मुक्त होगा कृषि उत्पाद - कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में सतत कृषि कार्यक्रम पर कार्यशाला

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Workshop

कार्यक्रम के दौरान मौजूद कलेक्टर और किसान।

कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में कलेक्टर शीलेंद्र सिंह की अध्यक्षता में सतत कृषि पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में टिकाऊ खेती, प्रकृति, मृदा एवं मानव स्वास्थ्य पर जोर दिया गया।
कलेक्टर ने कहा कि छिंदवाड़ा जिले के किसान अत्यंत नवाचारी किसान हैं। किसी भी नई तकनीक को बहुत जल्दी अपनाते हंै। जिले के किसान टिकाऊ खेती को अपना कर जहर मुक्त उत्पाद उगाएंगे, ताकि आने वाली पीढ़ी के लिए स्वस्थ पर्यावरण, स्वस्थ मिट्टी उपलब्ध हो सके। मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत अग्रिम कुमार ने टिकाऊ खेती को वर्तमान की आवश्यकता बताते हुए कहा कि प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों के लिए उचित बाजार
उपलब्ध कराकर किसानों को लाभांवित कराए।
डॉ. सीमा यादव ने पावर पाइंट प्रेजेंटेशन से योजना की जानकारी दी। उन्नत कृषकों को समन्वित खेती के लिए अपनाए गए सफल मॉडल के बारे में बताया। इससे कृषक इस मॉडल का लाभ प्राप्त कर सकेंगे। डॉ. शिवांगी ने बताया कि सतत कृषि पद्धति के लिए बनाए गए उत्कृष्ट मॉडल की हरदा एवं छिंदवाड़ा जिले में सर्वप्रथम शुरुआत की गई है, जिससे किसानों को सतत कृषि पद्धति के बारे में तकनीकी जानकारी प्राप्त होगी।

संतुलित उर्वरकों का उपयोग करने की सलाह

उपसंचालक कृषि जितेन्द्र कुमार सिंह ने सतत कृषि पद्धति के अंतर्गत जिले में किए जा रहे प्रयास अंतरवर्तीय खेती, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, प्राकृतिक खेती के बारे में जानकारी दी। फसल अवशेष प्रबंधन को टिकाऊ खेती के लिए अनिवार्य बताया। डॉ. आरसी शर्मा सह संचालक आंचलिक कृषि अनुसंधान केंद्र चंदनगांव ने किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड की अनुशंसा के आधार पर संतुलित उर्वरकों का उपयोग करने की सलाह दी।

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