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विश्व धरोहर दिवस… एक बार देख लो तो इतिहास जानने मजबूर कर देते हैं ये स्थल

चार सौ पुराने गोंडवाना सामाज्य के भग्नावशेष देवगढ़-हरियागढ़ किला, कहीं दिखती है पुतरी खोह की रॉक पेंटिंग्स

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devgadh chhindwara

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छिंदवाड़ा.चार सौ पुराने गोंडवाना साम्राज्य के भग्नावशेष देवगढ़-हरियागढ़ के किले अपने प्राचीन वैभव की गाथा कहते नजर आते हैं तो वहीं पुतरीखोह की रॉक पेंटिंग्स आदिवासी हस्तकला की प्रतीक है। छह मिलियन वर्ष पुरानी पातालकोट की घाटी को विश्व रिकार्ड में शामिल होने का गौरव मिला है। ये ऐसी धरोहरें हैं, जिन्हें एक बार देख लो तो मन पुराने इतिहास को जानने बैचेन हो उठता है। विश्व धरोहर दिवस 18 अप्रैल को इन एतेहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों को सहेजनेे और संरक्षित करने का न केवल संकल्प लेना होगा बल्कि पर्यटन को बढ़ाने के प्रयास भी करने होंगे।
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गोंडवाना से जुड़ा हरियागढ़ का किला
गोंडवाना साम्राज्य के शासक राजा जाटवा शाह से हरियागढ़ वर्तमान में हिरदागढ़ का इतिहास मिलता है। पुराने बुजुर्ग बताते हैं कि यहां एक प्राचीन टीलानुमा स्थान है, जहां रानी की बैठक किवदंती के रूप में प्रचलित है। चंडीमंदिर और दो गुफाएं तत्कालीन शासकों का पूजन स्थल रही है। किवदंती अनुसार एक गुफा का मार्ग देवगढ़ किले को जाता है। हिरदागढ़ ग्राम ग्राम पंचायत हनोतिया के ग्राम उमरखोह कला के समीप है।
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पुतरीखोह की रॉक पेंटिंग्स में दिखती है कला
विकासखंड हर्रई के ग्राम जामुनपानी के समीप स्थित सघन वन क्षेत्र में एक विशालकाय रॉक शेल्टर स्थित है, जिसे पुतरीखोह के नाम से जाना जाता है। माना जाता है कि आज से लगभग 12 हजार वर्ष पूर्व आदिमानव का निवास स्थल रहा है। उस समय में आदिमानवों ने प्राकृतिक रंगों से इस चट्टान पर चित्र उकेरे। ये भित्ति चित्र के रूप में आज भी विद्यमान हैं। इनके रंग अब सफेद दिखते हैं। इन भित्ति चित्रों में पानी छिड़का जाता है, तो वह लाल गेरुआ रंग के हो जाते हैं। स्थानीय आदिवासियों ने एक चबूतरा बनाकर देव की स्थापना भी की है। यह अति प्राचीन पुरातत्वीय धरोहर है।
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विश्व रिकार्ड का हिस्सा बनी पातालकोट घाटी
जिला मुख्यालय से 75 किमी दूर सतपुड़ा की वादियों में बसे ऐतिहासिक एवं जैव विविधता विरासत स्थल पातालकोट अब वल्र्ड बुक ऑफ रिकार्ड का हिस्सा बन गया है। हाल ही मे ेंस्विट्जरलैण्ड और दिल्ली की टीम ने इसका प्रमाणपत्र सौंपा। इस घाटी की उम्र छह मिलियन वर्ष होने की वैज्ञानिक पुष्टि हुइ हैं। इसे राज्य शासन ने जैव विविधता विरासत स्थल घोषित किया है।
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बावलियों के लिए प्रसिद्ध देवगढ़ किला
देवगढ़ प्राचीन ऐतिहासिक गोंड राजाओं की शानदार विरासत है, जहां किलों, बावलियों एवं बारहमासी पहाड़ी झरनों से गिरनेवाली बूंदों से भरनेवाले मोती टांका को देखा जा सकता है। चार सौ साल पुराने इस किले की बावलियों की पिछले साल मरम्मत भी कराई गई है। यहां पर्यटकों का आकर्षित करने के प्रयास हो रहे हैं।
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हर जगह बिखरे पड़े हैं एतेहासिक, धार्मिक स्थल
छिंदवाड़ा जिले की चार दिशाओं को देख लिया जाए तो हर जगह एतेहासिक, धार्मिक स्थल मौजूद है। सिवनी रोड पर चौर के पास गोदड़देव है तो सबसे ज्यादा तामिया, जुन्नारदेव में तुलतुला पहाङ़, छोटा महादेव, अनहोनी, सतधारा, मुत्तोर बन्धान, ग्वालगढ़ के शैलचित्र, पाइन गार्डन, भूराभगत, जुन्नारदेव विशाला की पहली पायरी, गैलडुब्बा, बन्दरकूदनी है। तामिया में में 26 पर्यटक स्थल खोजे गए हैं। सौंसर, पांढुर्ना, अमरवाड़ा, हर्रई, बिछुआ में भी जगह-जगह ऐसे प्राकृतिक व धार्मिक स्थलों को देखा जा सकता है। छिंदवाड़ा शहर में टाउनहाल की इमारत विरासत स्थल है।
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