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कला से विकास की इबारत लिख रहे युवा आर्टिस्ट

ग्रुप में ज्यादातर लोग कलाकार हैं और कला के माध्यम से ही किसानों, महिलाओं और बच्चों को जागरूक कर रहे हैं। 

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mithilesh dubey

Apr 14, 2016

chhindwara

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मिथिलेश धर दुबे

छिंदवाड़ा . सौंसर के ग्राम पंचायत पारडसिंगा में युवाओं की एक टोली गांव की सूरत और रंगत बदल रही है। युवाओं की ये टोली स्वच्छता, किसानों और महिलाओं को न सिर्फ जागरूक कर रही बल्कि उन्हें संबंधित सुविधाएं भी मुहैया करा रही है। इनका तरीका भी दूसरों से भिन्न है। ग्रुप में ज्यादातर लोग कलाकार हैं और कला के माध्यम से ही किसानों, महिलाओं और बच्चों को जागरूक कर रहे हैं। श्वेता भट्टड़ (30) पेशे से मूर्ति कलाकार, परविंदर (30) कोरियोग्राफर, आदर्श (18) सीए के छात्र हैं, ये सभी लोग ग्राम आर्ट प्रोजेक्ट (एनजीओ या संस्था नहीं) के तहत काम कर रहे हैं। इसके अलावा इनके साथ गांव के कई अन्य लोग भी हैं, जो प्रोजेक्ट को मूर्त रूप देने में सहयोग कर रहे हैं।


किसानों के लिए बनवा रहे तालाब

पारडसिंगा में किसानों के लिए पानी की समस्या हमेशा से रही है। आसपास न तारे कोई तालाब है और न ही नदी। इसी को देखते हुए ये युवा बलराम परियोजना के तहत तालाब का निर्माण करवा रहे हैं। तालाब ग्राम आर्ट प्रोजेक्ट की फाउंडर मेंबर श्वेता भट्ड़ के खेत में बन रहा है। अच्छी बात ये है कि तालाब निर्माण में गांव के किसानों के साथ-साथ बच्चे और युवा भी सहयोग दे रहे हैं। ये तालाब गांव के पहला तालाब है और अब ये तालाब गुगल अर्थ भी दिख रहा है।

पाकिस्तानी कलाकार ने कठपुतली बनाना सिखाया

2014 जून में पारडसिंगा आए पाकिस्तानी कलाकार हामिद खत्री ने यहां के लोगों को कठपुतली बनाना सिखाया, अपने नाटक से लोगों को जागरूक किया। हामिद 10 दिन रुकने के बाद अपने देश लौट तो गए लेकिन अब वहां से सोशल साइट और स्काइप के जरिए पारडसिंगा के छात्रों को कला की बारीकियां सीखा रहे हैं।

दूसरे देशों के किसान स्काइप पर दे रहे जानकारी


2014 में आयोजित कार्यक्रम में कलाकरों के साथ अन्य देशों के किसानों को भी आना था लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। इस बारे में श्वेता बताती हैं कि इससे उनकी टीम को थोड़ी निराशा जरूर हुई लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और किसानों को स्काइप से जोड़ा। अब हर रविवार शाम को किसानों को इकट्ठा किया जाता है और उनकी बात अन्य देशों के किसानों से करवाई जाती है। किसानों ने बताया कि इससे उन्हें फायदा ये है कि वे अन्य देशों की तकनीकी और विधि से रू-ब-रू होते हैं और अपनी विधि भी शेयर करते हैं। टीम के ही सदस्य परविंदर और आदर्श बताते हैं कि उनका लक्ष्य ही मिलकर काम करने का है।

इको फ्रेंडली शौचालय का किया निर्माण


श्वेता ने गांव को खुले से शौच मुक्त बनाने के लिए इको फ्रेंडली शौचालय का निर्माण किया है। जिसे जल्द ही गांवों में वितरित किया जाएगा। ये शौचालय बांस का बना है। इसको महिलाओं को ध्यान में रखकर बनाया गया है। श्वेता ने बताया गांव की महिलाएं ग्रुप में शौच जाती हैं। जिस कारण वे शौचालय का प्रयोग नहीं कर रहीं हैं। इसी को देखते हुए ऐसे शौचालय का निर्माण किया गया है जो ऊपर से खुला रहेगा जिससे बात करने में आसानी रहेगी। इसको इस तरह से डिजाइन किया जा रहा कि निकलने वाले यूरीन को खाद के लिए इस्तेमाल किया जा सकेगा।

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