
एफ.डी.डी.आइ से फुटवेयर डिजाइनिंग में एम.एस.सी (एफटी) करने के बाद दिल्ली सहित कई महानगरों में प्राइवेट नौकरी करने वाले हर्षित साहू की कहानी अन्य युवकों से बहुत अलग है।,एफ.डी.डी.आइ से फुटवेयर डिजाइनिंग में एम.एस.सी (एफटी) करने के बाद दिल्ली सहित कई महानगरों में प्राइवेट नौकरी करने वाले हर्षित साहू की कहानी अन्य युवकों से बहुत अलग है।,एफ.डी.डी.आइ से फुटवेयर डिजाइनिंग में एम.एस.सी (एफटी) करने के बाद दिल्ली सहित कई महानगरों में प्राइवेट नौकरी करने वाले हर्षित साहू की कहानी अन्य युवकों से बहुत अलग है।
छिंदवाड़ा. एफ.डी.डी.आइ से फुटवेयर डिजाइनिंग में एम.एस.सी (एफटी) करने के बाद दिल्ली सहित कई महानगरों में प्राइवेट नौकरी करने वाले हर्षित साहू की कहानी अन्य युवकों से बहुत अलग है। आराम की नौकरी छोड़कर उन्होंने कुछ अलग करने की ठानी तो उन्हें आज छिंदवाड़ा के हनी मैन के रूप में पहचान मिल चुकी है। शुरुआती दौर में ही 3 से 5 लाख रुपए की आमदानी हो रही है। दिल्ली में एक प्राइवेट नौकरी करते हुए हर माह 20 हजार रुपए पाने वाला युवक हर दिन खेती किसानी के क्षेत्र में जाना चाहता था। नौकरी छोड़कर पॉली हाउस निर्माण और फूलों की खेती का प्रशिक्षण लेकर छिंदवाड़ा लौटा तो पता चला कि जिले में पॉली हाउस का टारगेट बहुत कम है, इसीलिए लोग खुले में फूलों की खेती करते हैं, यह सोचकर हर्षित साहू फिर उत्तरप्रदेश पहुंचा, जहां उसने बगैर पॉली हाउस के खुले में फूलों की खेती का प्रशिक्षण लिया इस दौरान वहां सड़क के किनारे मधुमक्खी पालकों और बॉक्सों पर नजर पड़ी, यहां से युवक का मधुमक्खी पालन की तरफ रुझान बढ़ा। यहां से हर्षित ने 20 मधुमक्खी के बॉक्से खरीदे और छिंदवाड़ा लौट आया। स्थानीय स्तर पर बाजार और फूलों की उपलब्धता से लेकर अन्य कई सारी चुनौतियों का सामना करते हुए बीते चार साल में हर्षित के पास 250 बॉक्स है, जो स्थाई रूप से छिंदवाड़ा में है, जबकि 500 ऐसे बॉक्स हैं, जिन्हें हर्षित फूलों का मौसम देखते हुए अन्य प्रदेशों में भी घूमता है। मप्र, उत्तरप्रदेश और राजस्थान में मौसम के अनुसार आने वाले फूलों या फिर वहां के किसानों के खेतों के आस-पास बॉक्स रखते हैं जिससे एक विशेष फूल का पराग मक्खियां जुटाती है। इससे तैयार होता है चार प्रकरण का शहद, जिसकी बाजार में धीरे-धीरे मांग बढ़ती जा रही।
चार प्रकार के शहद का उत्पादन
छिंदवाड़ा के सोनपुर रोड निवासी हर्षित साहू ने बताया कि वे जामुन, लिची, बेर और निलगिरी के शहद का उत्पादन ले रहे हैं। अलग-अलग मौसम में इन पेड़ों और पौधों पर फूल आते हैं। ऐसी जगह चिन्हित की हैं, जहां इनके फूल अधिक मात्रा में पाए जाते हैं, वहां मधुमख्यिों के बॉक्स रखते हैं। इस तरह चार प्रकार के शहद का उत्पादन लिया जा रहा है। जिले के सौंसर और पांढुर्ना ब्लॉक में उन्होंने कई बॉक्स बेचे हैं जिसका मूल्य साढे चार हजार से लेकर पांच हजार रुपए हैं। उन्होंने बताया कि बॉक्स खरीदने के लिए सरकार 40 प्रतिशत का अनुदान भी देती है उपलब्धता के आधार पर।
इटली की मधुमक्खी से कमा रहे लाखों
इटली की मधुमक्खी स्वभाव से शांत होती है, जिसके चलते उन्हें हटाकर शहद निकालने में किसी तरह की परेशानी नहीं होती। हर्षित सालाना 3 से 5 क्विंटल शहद का उत्पादन ले रहा है, जिसे जिला मुख्यालय के कुछ मेडिकल स्टोर, किराना दुकान, ऑनलाइन भी बेच रहा है। साथ ही उसने अभी होम डिलेवरी भी शुरू कर दी है। थोक में नागपुर और जबलपुर सप्लाई दी जा रही है। शहद के व्यापार से सालाना 3 से 5 लाख रुपए कमा रहा। साथ ही 1 से 1.50 लाख रुपए खर्च आता है।
ऐसे तैयार होता है शहद
एक विशेष प्रकार के फूलों के आस-पास मधुमक्खी का बॉक्स रख दिया जाता है। बॉक्स से मधुमक्खी निकलकर फूलों पर बैठती है और यहां से पराग लेकर बॉक्स में लौटकर शहद का निर्माण करती है। सामान्य तौर पर 20 से 25 दिन में शहद तैयार हो जाता है। हर्षित साहू के अनुसार फूलों के साथ ही प्रकृति पर भी निर्भर करता है, तेज हवा और अधिक बारिश के दिनों में शहद तैयार होने में समय अधिक लगता है।
Published on:
17 Jun 2021 07:49 pm

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