
400 साल से अधिक समय हो गया आज भी सुरक्षित रखी है गोस्वामी तुलसीदास हस्त लिखित श्री रामचरितमानस, जानें खास बातें
चित्रकूट: हिंदी साहित्य के महान कवियों में से एक दुनिया को श्री रामचरितमानस के माध्यम से भगवान राम के मानव अवतार के चरित्र से परिचित कराने वाले गोस्वामी तुलसीदास की हस्तलिखित श्री रामचरितमानस आज 400 सालों से अधिक समय से सुरक्षित रखी है. यकीन करना शायद थोड़ा मुश्किल हो सकता है परंतु यह सच है. लगभग 431 वर्षों बाद आज भी चित्रकूट के राजापुर कस्बे में यमुना के किनारे बने तुलसी मंदिर में यह दुर्लभ पांडुलिपि सहेज कर रखी गई है. अब तक न जाने विश्व के कितने साहित्यिक विद्वानों(खासकर हिंदी साहित्य) ने इस अमूल्य धरोहर का अवलोकन कर अपने अद्भुत बयां किए हैं लेकिन अफ़सोस की आज तक किसी भी सरकार या प्रशासन ने इस महान कवि के महान ग्रन्थ और इस जगह को देश दुनिया के पर्यटन के पटल पर लाने का कच्छप प्रयास भी नहीं किया जबकि कभी मुगल बादशाह अकबर ने 96 बीघा भूमि तुलसी मंदिर के भोग प्रसाद व् बाजार तथा घाट के रख रखाव के लिए दी थी जिसका उल्लेख आज भी मिलता है.
जानें खास बातें
1. चित्रकूट गोस्वामी तुलसीदास की जन्म स्थली है, जनपद के राजापुर कस्बे में उनका जन्म हुआ था.
2. ऐतिहासिक उल्लेखों के मुताबिक श्री रामचरितमानस को लिखने में गोस्वामी तुलसीदास को 2 वर्ष 7 महीने 26 दिन का समय लगा था. सन् 1587 में इस महान ग्रन्थ को लिखने की शुरुआत की गई थी.
3. राजापुर स्थित तुलसी मंदिर में जो हस्तलिखित रामचरितमानस रखी है वो इस ग्रन्थ का"अयोध्या कांड" नामक अध्याय है.
4. 11×5 के आकार के 170 पन्नें सुरक्षित रखे गए हैं.
5. जापान में बने विशेष पारदर्शी टिशु पेपर को मूल पन्ने के ऊपर बेहद सावधानी से लगाया गया है, साथ ही एक खास तरह का केमिकल का भी प्रयोग किया गया है इन लेखों को सुरक्षित रखने के लिए.
6. तुलसीदास के पहले शिष्य गणपतराम के वंशज इस दुर्लभ पाण्डुलिपि व् मंदिर की देखरेख करते चले आ रहे हैं.
7. विनय पत्रिका, कृष्ण गीतावली, दोहावली जैसी कई प्रसिद्ध रचनाएं गोस्वामी तुलसीदास ने रची.
8. जनपद मुख्यालय से लगभग 35 किलोमीटर दूर स्थित है राजापुर कस्बा, पड़ोसी जनपद कौशाम्बी व् फतेहपुर से सटा हुआ है. हर जगह से आवागमन के मार्ग उपलब्ध हैं.
Published on:
21 Aug 2018 12:48 pm
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