
श्रीराम को तपोभूमि चित्रकूट को मिली नई पहचान, यहां के युवा बने
चित्रकूट. पिछले कई दशकों से यदि श्री राम की तपोभूमि चित्रकूट को जाना जाता था तो वह था वहां के खूंखार डकैतों की दहशतगर्दी। ददुआ ठोकिया रागिया बलखड़िया बबुली कोल लवलेश कोल जैसे खूंखार डकैतों के ख़ात्मे के बाद अब राम की तपोभूमि की पहचान कुछ कुछ बदल रही है और यहां के कई युवा अपनी मातृभूमि की कुख्यात डकैतों वाली दशकों पुरानी छवि तोड़ने हेतु प्रयासरत हैं। इसी के तहत राष्ट्रीय युवा महोत्सव में जिले के दो युवाओं को यूथ आइकॉन से नवाजा गया।
गढ़ रहे नया आयाम
चित्रकूट के अनुज हनुमत द्विवेदी ने इलाके के कई ऐसे दुर्लभ स्थानों को सिस्टम के सामने लाया जहां आजादी के बाद भी सिस्टम की रोशनी नहीं पहुंची थी। जनपद को देश दुनिया के पर्यटन मानचित्र पर पहचान दिलाने के उद्देश्य से युवा अनुज हनुमत ने लखनऊ से लेकर दिल्ली तक ज़िम्मेदारों को राम की तपोभूमि के प्राचीन धार्मिक ऐतिहासिक धरोहरों से अवगत कराया। दूसरी तरफ पाठा क्षेत्र के अतिसंवेदनशील दस्यु प्रभावित क्षेत्र मारकुंडी के रिटायर्ड फौजी प्रदीप शुक्ला इलाके के युवाओं को सैनिक बनने की निःशुल्क ट्रेनिंग दे रहे हैं।
राष्ट्रीय युवा महोत्सव में बनें यूथ आइकॉन
पाठा के इन दो युवाओं को लखनऊ में आयोजित राष्ट्रीय युवा महोत्सव 2020 में यूथ आइकॉन के रूप में सम्मानित किया गया। इस सम्मान से नवाजे गए युवा अनुज हनुमत ने कहा कि ये उनका नहीं उनकी मातृभूमि का सम्मान है। उनका जनपद(चित्रकूट) पर्यटन से लेकर प्रतिभा तक हर तरह की संभावनाओं से भरा है। जरूरत इस पहल की है कि सिस्टम अब उनके जिले को एक अलग नज़रिए से देखे और इसके लिए वे हमेशा प्रयासरत रहेंगे। वहीं दूसरे यूथ आइकॉन प्रदीप शुक्ला ने कहा कि जिस पाठा क्षेत्र के युवा कभी भटक कर या बहकावे में आकर बीहड़ की दुनिया में उतर जाते थे अब उसी इलाके में उनका प्रयास है कि युवाओं को एक अलग उद्देश्य दिया जा सके खुद को साबित करने का। दोनों युवाओं के यूथ आइकॉन से सम्मानित होने पर जिले के लोग भी गर्वान्वित हैं।
Updated on:
16 Jan 2020 01:22 pm
Published on:
16 Jan 2020 01:15 pm
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