
चित्रकूट. सिविल सेवा परीक्षा 2017 का परिणाम घोषित हो चुका है, विभिन्न प्रशासनिक सेवाओं में चयनित होने वाले प्रतियोगियों के घर गांव गली मोहल्लों में जश्न का दौर जारी है. किसी ने पहले तो किसी ने दूसरे या तीसरे और तो और किसी प्रतियोगी ने तो चौथे और छठे प्रयास में इस परीक्षा में सफलता प्राप्त की, जिससे उनकी लगन का अंदाजा अपने लक्ष्य व जुनून के प्रति लगाया जा सकता है.
सिविल सेवा परीक्षा में कई ठीक ठाक घरों से लेकर मेहनत मजदूरी व् किसानी करने वाले परिवारों के बेटे बेटियों ने भी इस बेहद कठिन परीक्षा में सफलता प्राप्त कर अपने गांव कस्बों जनपद का नाम रोशन किया है. चित्रकूट जनपद का ऐसा ही एक गांव है जो पहचाना जाता है आईपीएस और आईपीएस अधिकारीयों के लिए. गांव के लगभग दर्जन भर से अधिक लोग आज सिविल सेवा के विभिन्न उच्च पदों पर आसीन हैं. अभी हाल ही में घोषित हुए परिणाम में परम्परानुसार फिर इस गांव के प्रतियोगी ने आईपीएस में सेलेक्शन पाकर अपने गांव की मिट्टी और जनपद का नाम रोशन किया है.
बेहद कठिन मानी जानी वाली भारतीय प्रशासनिक सेवा यानि आईएएस की परीक्षा में सफलता किसी भी प्रतियोगी छात्र का आमतौर पर पहला सपना होता है और सच्ची लगन और मेहनत से ही इस प्रतिष्ठित परीक्षा में सफलता प्राप्त की जा सकती है इसमें कोई संशय नहीं. कई ऐसे इलाके हैं देश में जिनकी पहचान वहां के खास नौकरी पेशा लोगों की वजह से होती है.
आईएएस आईपीएस के लिए जाना जाता है रैपुरा गांव
जनपद मुख्यालय से 20 किलोमीटर दूर रैपुरा गांव जो अपनी कई खासियतों के आलावा एक सबसे बड़ी बात के लिए अलग पहचान रखता है और वो है यहां की मिट्टी से ताल्लुक़ रखने वाले आईएएस आईपीएस. गांव के लगभग डेढ़ दर्जन से अधिक गुदड़ी के लाल इस समय आईएएस आईपीएस पीसीएस जैसी विभिन्न सेवाओं में उच्चाधिकारी के पद पर कार्यरत हैं. गांव के अभिजीत सिंह(आईएएस) यदुवेंद्र शुक्ल(आईपीएस) सीपी सिंह(आईएएस) तेज स्वरुप(पीपीएस) सुरेन्द्र(पीसीएस) राजेन्द्र(पीसीएस) प्रकाश(पीसीएस) सुरेश चन्द्र पाण्डेय प्रह्लाद सिंह सुरेश गर्ग(सभी पीसीएस) सहित डेढ़ दर्जन से अधिक लोग आज विभिन्न पदों पर आरूढ़ हैं. रैपुरा गांव इन सभी का पैतृक गांव है. अधिकांश युवा आज सिविल सेवा की परीक्षा की तैयारी के लिए बाहर रहकर पढ़ाई में जुटे हैं. हर साल कोई न कोई छात्र जरूर सिविल सेवा(आईएएस या पीसीएस) की परीक्षा में चयनित होता है.
रोहित बने आईपीएस
परम्परा को कायम रखते हुए इस बार गांव के रोहित सिंह ने संघ लोकसेवा आयोग की परीक्षा में चयनित होकर पुनः मिट्टी का नाम रोशन किया है. रोहित का चयन आईपीएस के रूप में हुआ है. रोहित के पिता रैपुरा गांव के रहने वाले हैं और इलाहाबाद में रेलवे में कार्यरत हैं. पोते की इस सफलता से गदगद रोहित के बाबा रैपुरा गांव निवासी बृजेन्द्र सिंह ने बताया कि सबसे पहले रोहित ने उनसे ही आशीर्वाद लिया सफलता मिलने पर जिससे यह महसूस होता है कि व्यक्ति भले ही कितना भी बड़ा अफसर या आदमी न बन जाए लेकिन उसे अपने पैतृक स्थानों को नहीं भूलना चाहिए और गांव के बड़े बुजुर्गों को भी. बाबा बृजेन्द्र के मुताबिक रोहित को चौथी बार में यह सफलता मिली है.
आईपीएस बनना सपना था
उधर दूरभाष पर बातचीत में सफलता से अभिभूत रोहित सिंह ने बताया कि उनका बचपन से सपना था आईपीएस बनने का. क्रिकेट और फिल्मों का भी शौक है उन्हें. लेकिन छुट्टियों आदि के दौरान या मौका मिलने पर उन्हें अपना गांव रैपुरा ही अच्छा लगता है. किताबें पढ़ना व लॉंग ड्राइव पर भी जाने का शौक रखते हैं रोहित. उनके चयन से माता पिता व बड़े भाई और बहन फ़ूले नहीं समा रहे. रोहित का ननिहाल भी चित्रकूट के मढ़ैयन गांव में है.
Published on:
29 Apr 2018 03:39 pm
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