
चित्रकूट. रंगों का त्यौहार होली पूरी मस्ती व उल्लास के साथ मनाया गया। चारो तरफ रंगों की सतरंगी बौछार से हर कोई भीगा नजर आया। एक दूसरे के गालों पर गुलाल मलकर लोगों ने होली की बधाइयां दी। आधुनिकता से इतर जनपद में अधिकांश जगहों पर डीजे की धुन नहीं बल्कि ढोल मजीरे की थाप पर फागुन व होली के गीतों से वातावरण रंगीन हो उठा। फाग गीतों पर जमकर ठुमके लगाए गए। चित्रकूट जनपद में दो दिनों तक होली का त्यौहार मनाया जाता है। ग्रामीण क्षेत्रों में समूहों में एकत्रित होकर होली के गीतों से फागुन महोत्सव मनाया गया।
दस्यु प्रभावित क्षेत्रों में पुलिस रही सक्रिय
आपसी भाईचारे और रंगों के त्यौहार होली की मस्ती सभी के सिर चढ़कर बोलती दिखी। हर वर्ग और हर उम्र के लोग रंगों की बौछार में सराबोर होकर होली का आनंद लेते दिखे। जनपद के कई क्षेत्रों में अभी भी पारंपरिक होली गीतों पर थिरकने की परंपरा निभाई जाती है, जिसे सुनकर इस त्यौहार के परंपरागत स्वरूप का आभास होता है। ढोल मंजीरों की थाप पर थिरकते पैर व ठेठ देशी अंदाज में फागुन के गीतों से वातावरण ने खुशनुमा माहौल की चादर ओढ़ लिया। दूसरी ओर साम्प्रदायिक सौहार्द को प्रदर्शित करते हुए हिन्दू मुस्लिम सभी ने अबीर लगाकर एक दूसरे को बधाई दी व देश में अमन चैन की दुआ की। दस्यु प्रभावित क्षेत्रों में भी पुलिस की सक्रियता से बेख़ौफ़ माहौल में लोगों ने होली मनाई। संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए गए थे।
आधुनिकता की चकाचौंध में भी परंपरा बरक़रार
एक तरफ महानगरों में जहां डीजे की धुन और फ़िल्मी गीतों पर होली का हुड़दंग चरम पर रहता है तो ग्रामीण परिवेश में होली का परंपरागत स्वरुप अभी भी बरक़रार है। हर वर्ग उम्र के लोग गांव में टोलियां बनाकर ढोल मंजीरों की थाप पर झूमते नजर आए। लोक गीतों की मीठी बानी ने परम्परागत होली की झलक प्रस्तुत की और सारे गिले शिकवे मिटाकर एक दूसरे को अबीर गुलाल लगाये। गांव के सामूहिक चौपाल वाले स्थान पर फाग लोकगीतों की लय यह साबित करते दिखे कि परम्पराएं इतनी आसानी से और इतनी जल्दी ख़त्म नहीं होती।
Published on:
03 Mar 2018 12:34 pm
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