
दस्यु गौरी का पता नहीं और बबुली के कदमों के निशां नहीं, खोखली साबित हो रही खाकी की हर रणनीति
चित्रकूट. बीहड़ में खौफ की हुकूमत कायम कर चुके इस समय के दो सबसे बड़े दस्यु सरगनाओं साढ़े पांच लाख के इनामी बबुली कोल और सवा लाख के इनामी गौरी यादव की लोकेशन किस कोने में है ये खाकी के नसीब में जानना नहीं लिखा शायद। हाल फिलहाल अभी तक की जो तस्वीर सामने आई है दस्यु उन्मूलन अभियान को लेकर उसे देखकर यही कहा जा सकता है। दस्यु गौरी यादव को तो जैसे खाकी ने अभयदान दे रखा हो और खूंखार बबुली के तो कदमों के निशां भी नहीं मिल रहे जंगलों की खाक छानती खाकी को। सारी रणनीतियां फेल साबित हो रही हैं क्योंकि कोई ठोस रणनीति ही नहीं बनाई जा रही।
क्यों चूक रही है पुलिस
बीहड़ के सूत्रों के मुताबिक इस समय जबकि बीहड़ और जंगल एकदम से वीरान हैं और दस्यु गैंग पानी आदि की तलाश में अक्सर विचरण करता हुआ नजर आता है तो ऐसे हालातों में पुलिस क्यों चूक रही है यह समझ से परे है। उधर दस्यु गौरी यादव को एक तरह से दस्यु उन्मूलन अभियान की हिटलिस्ट से लगता है खाकी ने गायब कर दिया है तभी तो पिछले तीन वर्षों से इस कुख्यात डकैत के खिलाफ कोई खास एक्शन नहीं लिया गया। गौरी के प्रति खाकी की इस रहमदिली को लेकर बीहड़ में चर्चाओं का बाजार जरूर गर्म होता रहता है।
हर रणनीति हो रही है फेल
हर बार खाकी के लम्बरदार कुख्यात बबुली को ठिकाने लगाने के नए आयाम बनाते और बताते हैं लेकिन हर रणनीति धरी की धरी रह जाती है। जंगलों की खाक छानती फोर्स हर दिन उल्टे पांव अपने बैरकों में वापस लौट आती है। हर बार मीडिया से लेकर दस्यु प्रभावित इलाकों के ग्रामीणों के सामने दस्यु गैंगों से निपटने का दम्भ भरा जाता है लेकिन हकीकत में अभियान की हवा निकल जाती है।
गौरी को भूल गई और बबुली की परछाई को तरस रही खाकी
इसमें कोई संशय नहीं कि खाकी सवा लाख के इनामी दस्यु गौरी यादव को भुलाए बैठी है और वो भी न जाने किस रणनीति के तहत। जबकि गौरी अक्सर सरकारी कार्यों में रंगदारी मांगने मजदूरों को धमकाने मारने पीटने की घटनाओं को लेकर चर्चा में बना रहता है। बावजूद इसके खाकी की नजरें उसपर इनायत नहीं हो रही। उधर कई बार सीधी टक्कर ले चुके खूंखार बबुली की परछाई तक को ट्रेस करने के लिए खाकी तरस रही है। बीहड़ के गवाहों के मुताबिक पुलिस के ढीले अभियान को देखकर गैंग आराम से बीहड़ों में विचरण कर रहा है और यूपी एमपी के सीमाई इलाकों में अपना सुरक्षित ठिकाना गैंग ने बना रखा है।
अब नहीं तो कब
पाठा के बीहड़ और जंगल गर्मी के मौसम में जहां एकदम वीरान हो जाते हैं वहीँ बारिश के दिनों में इन इलाकों में थोड़ी दूर देखना भी मुश्किल हो जाता है घने जंगल व् बीहड़ों में। इलाकाई बाशिंदों का भी मानना है कि अभी दस्यु गैंगों को ठिकाने लगाने में खाकी को कामयाबी मिल सकती है लेकिन सटीक मुखबिरी के अभाव में सबकुछ शून्य साबित हो रहा है।
डकैत भी चल रहे अपनी चाल
उधर डकैत भी अपनी चाल चल रहे हैं। वीराने बियाबान में वारदातों को अंजाम देने से बच रहे हैं। बबुली ने चुप्पी साध रखी है। जबकि बारिश का मौसम आते ही दस्यु गैंग सक्रीय हो जाते हैं और अपहरण हत्या लूट जैसी वारदातों को अंजाम देने लगते हैं। एक नजर में यदि देखा जाए तो अधिकांश वारदातें जुलाई से लेकर सितम्बर के महीने तक दस्यु गैंगों द्वारा अंजाम दी गई हैं। जंगल घना होने के कारण इन महीनों में डाकुओं को ट्रेस करना हमेशा से मुश्किल काम रहा है खाकी के लिए।
डकैतों की तलाश में कोई ढिलाही नहीं बरती जा रही
डकैतों के खात्में को लेकर खाकी की अपनी वही दलील है। एसपी मनोज कुमार झा का कहना है कि दस्यु गैंगों के खात्में के लिए अभियान में कोई ढिलाही नहीं बरती जा रही। कॉम्बिंग और सर्च ऑपरेशन के द्वारा डकैतों को ट्रेस किया जा रहा है मौका मिलते ही उन्हें उनके अंजाम तक पहुंचा दिया जाएगा।
Published on:
04 Jun 2018 02:48 pm

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