
रामलीला: जब लंकापति रावण की गर्जना से कांप उठे तीनों लोक, साधू के भेष में किया सीता का हरण
चित्रकूट. मैं दशानन तीनो लोकों का अधिपति रावण, रावण हूं मैं, उसकी बहन के साथ कोई दुर्व्यवहार करने की चेष्टा भी कैसे कर सकता है ? कौन है वो वो जिसने लंकेश की बहन को अपमानित किया ? रावण की इस क्रोधाग्नि भरी गर्जना से धरती हिलने लगी तो आसमां कांपने लगा, तीनों लोक भयाक्रांत हो गए। बहन के अपमान का बदला लेने को साधू के भेष में रावण ने सीता का हरण किया। वायु मार्ग से लंका जाते समय गिद्धराज जटायु से रावण का युद्ध हुआ जिसमें जटायु पराजित हो गए। कुछ ऐसा ही जीवंत अभिनय हो रहा है भगवान राम की तपोभूमि चित्रकूट में रामलीला मंचन के दौरान। मुख्यालय स्थित ऐतिहासिक श्री रामलीला समाज पुरानी बाजार कर्वी के तत्वाधान में हो रहे रामलीला मंचन में जब लंकाधिपति रावण ने दर्शकों के सामने गर्जना भरी तो सहसा लगा की प्रत्यक्ष रावण ही तो नहीं प्रकट हो गया। कलाकारों द्वारा हर पात्र को इतने जीवंत तरीके से अभिनीत किया जा रहा है की जब वे नजरों के सामने आते हैं तो महसूस होता है की जिन पात्रों के बारे में सुना और समझा गया है वे इस वक्त प्रत्यक्ष नजरों के सामने विद्यमान हैं।
रामायण के हर पात्र से मिलती कोई न कोई सीख
मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम का चरित्र जीवन की किन्ही भी परिस्थितियों में संयम न खोने की सीख देता है तो माता सीता नारी शक्ति और ममता का सन्देश देती हैं तो वहीँ रावण का अहंकार उसके विनाश की लीला का स्वयं आमंत्रण देते हुए व्यक्ति को अपनी शक्ति सामर्थ्य का दुरुपयोग न करने और अधर्म के मार्ग पर न चलने की सीख देता है। बड़ों की सेवा उनका सम्मान और आज्ञापालन का सन्देश देते हुए लक्ष्मण मनुष्य को अपने कर्तव्य के प्रति हमेशा सजग रहन का सन्देश देते हैं। आज के आधुनिक परिवेश में भी रामलीला की प्रसांगिकता कम नहीं हुई और शायद इसीलिए देश के छोटे बड़े इलाकों से लेकर महानगरों तक रामलीला का मंचन हो रहा है।
Published on:
14 Oct 2018, 2:52 PM IST
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