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उपेक्षा के शिकार मानिकपुर पाठा क्षेत्र के यह पर्यटन स्थल

चित्रकूट पाठा क्षेत्र के गांव टिकरिया से लगभग 3 किमी दूर स्थित सबरी जल प्रपात जिसका अब वन विभाग नाम तुलसी जल प्रपात रख दिया है। पर्यटन व धार्मिक दृष्टिकोण से बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान है,लेकिन अभी तक पर्यटकों के लिए कोई सुविधा मुहैया नहीं हो सकी है।

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तुलसी जल प्रपात की तस्वीर

उपेक्षा के शिकार मानिकपुर पाठा क्षेत्र के यह पर्यटन स्थल

चित्रकूट पाठा क्षेत्र के गांव टिकरिया से लगभग 3 किमी दूर स्थित सबरी जल प्रपात जिसका अब वन विभाग नाम तुलसी जल प्रपात रख दिया है। पर्यटन व धार्मिक दृष्टिकोण से बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान है,लेकिन अभी तक पर्यटकों के लिए कोई सुविधा मुहैया नहीं हो सकी है।

हालाँकि इस स्थान का विकास किया जा रहा है. लेकिन उसकी रफ्तार काफी धीमी है,पर्यटकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए अगर इसका पूर्ण विकास कर दिया गया तो धार्मिक व घूमने वालों के लिए काफी बढ़िया पर्यटन स्थल में सुमार होगा। वर्तमान में यहां तक केवल वही पहुंच पाते हैं जिनके पास खुद का साधन होता है।

मान्यता के अनुसार श्रीराम ने यही खाए थे झूठे बेर

तुलसी जल प्रपात के बारे में कहा जाता है कि जब श्रीराम बनवास में थे. तब छोटे भाई लक्ष्मण व माता जानकी के साथ उनकी भक्त आदिवासी सबरी के पास यहां आए थे,उसके जूठे बैर खाये थे।

विकास होने के बाद बढ़ जायेगी पर्यटन की संभावना

जिसके उल्लेख राम चरित मानस में मिलता है। पर्यटन की काफी संभावनाओं के बावजूद यह स्थान अब तक उपेक्षित पड़ा हुआ था अब तक जानकर तीर्थ यात्री या क्षेत्र के लोग ही पिकनिक मनाने की दृष्टि से अपने निजी साधनों से यहां आते थे,यहां का दृश्य भी काफी मनोरम है जो कि पर्यटकों को लुभाता है। इसका सम्पूर्ण विकास कर दिया जाता है. तो अच्छा पर्यटन स्थल साबित होगा।

दस्यु प्रभावित क्षेत्र के चलते नहीं हुआ था विकास

पहले यह क्षेत्र दस्यु प्रभावित माना जाता था.लेकिन बमाशों के मारे जाने के बाद काफी तादाद में पर्यटकों का आना जाना होने लगा है। जंगली क्षेत्र होने के कारण जंगली जानवरों का भी खतरा बना रहता है,शासन की ओर से अभी तक इन स्थानों की सुरक्षा ब्यवस्था की कोई पहल नहीं कि गयी।

तुलसी जल प्रपात के बीच स्थित है मार्कंडेय आश्रम

मानिकपुर व तुलसी जल प्रपात के बीच मे मारकुंडी गांव से लगा मार्कण्डेय ऋषि का आश्रम है।
जहां पर मार्कण्डेय ऋषि रह कर तपस्या करते थे। वहीं उनकी समाधि भी है,जंगल के बीच मे मौजूद इस आश्रम का दृश्य बहुत ही मनोरम है। धार्मिक लोग व पर्यटको का यहां आवागमन हमेशा बना रहता है लेकिन यह स्थान आज भी उपेक्षित पड़ा हुआ है।

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