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बिन पानी सब सून: गहराते पेयजल संकट को लेकर प्रशासन चिंतित, डीएम ने मातहतों के पेंच कसे

बिन पानी सब सून: गहराते पेयजल संकट को लेकर प्रशासन चिंतित, डीएम ने मातहतों के पेंच कसे

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chitrakoot

चित्रकूट. पाठा सहित जनपद के अन्य इलाकों में भीषण पेयजल संकट को देखते हुए डीएम ने मातहतों के साथ बैठक कर समस्या से निपटने के दिशा निर्देश दिए। तालाबों पोखरों को भरने सहित हैण्डपम्पों के रिबोर को लेकर भी जल निगम को हिदायत दी गई। उधर कई इलाकों में पानी की किल्लत ने इलाकाई बाशिंदों को पानी पिला दिया है। जल संकट को लेकर ग्रामीण व कस्बाई क्षेत्रों में लगभग एक जैसे हालात हैं।

पेयजल समस्या को लेकर बुंदेलखण्ड में हलचलों का दौर है। शासन स्तर से इलाके के चार जनपदों के जल निगम के जिम्मेदारों को नापे जाने के बाद जनपद स्तर पर समस्या से निपटने की कवायदें तेज हो गई हैं, परंतु संकट की सूरत ज्यों की त्यों है। कारण कि पिछले कई वर्षों के दौरान इतनी शिथिलता बरती गई कि पेयजल समस्या ने बुन्देलखण्ड में सुरसा के मुंह जैसा स्वरूप अख़्तियार कर लिया है. गर्मी के इतर भले ही इस समस्या की गूंज कम हो जाए लेकिन पुनः गर्मी की दस्तक होते ही जल संकट का जिन्न बाहर आ जाता है और फिर अपनी हुंकार से पूरी व्यवस्था को कटघरे में खड़ा कर देता है।

गहरा रहा है पेयजल संकट

जनपद के विभिन्न इलाकों में पेयजल संकट की भयावाहता की तस्वीरें दिनों दिन मीडिया की सुर्खियां बन रही हैं। हैण्डपम्पों पर पानी भरने वाले डिब्बों की जद्दोजहद बाल्टियों की आपसी खींचातानी मटकों की बेबसी बुन्देलखण्ड की इस नासूर बन चुकी समस्या की हकीकत खुद बयां करती है।

पाठा क्षेत्र के मानिकपुर मारकुंडी बहिलपुरवा सहित पहाड़ी राजापुर मऊ बरगढ़ थाना क्षेत्रों के कस्बाई व ग्रामीण इलाके जल देवता की बेरुखी झेल रहे हैं। बेजुबानों की हालत तो और भी दयनीय स्थिति में पहुंच रही है। पानी के लिए इधर उधर भटककते जंगली जानवर व पशु हलक तर करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

डीएम ने दिए दिशा निर्देश

पेयजल संकट को लेकर डीएम विशाख जी अय्यर ने मातहतों के साथ बैठक कर उन्हें खास दिशा निर्देश दिए। तालाबों पोखरों को जल्द से जल्द भरने के लिए ग्राम प्रधानों व् सचिवों सहित विभागीय अधिकारीयों को हिदायत दी गई. पशुओं की समस्या को देखते हुए चरही आदि को भी भरने के निर्देश दिए गए। सबसे ज्यादा हैण्डपम्पों को लेकर मंथन किया गया। डीएम ने जल निगम को निर्देशित किया कि प्रभावित इलाकों में भ्रमण कर इंडियन मार्का हैण्डपम्प की व्यवस्था की जाए और जो रिबोर के लायक हैं उन हैण्डपम्पों को रिबोर कराने में लापरवाही न बरती जाए। मनरेगा के तहत कूपों की खोदाई कराने का भी निर्देश डीएम ने दिया।

जितनी आबादी उतने से कम हैं हैण्डपम्प

कई इलाकों में आबादी के सापेक्ष हैण्डपम्पों की संख्या कम होने से जल संकट का हौंसला और बढ़ जाता है। पहाड़ी ब्लाक के अशोह पुरवा गांव में जितनी आबादी है उसके इतर कम हैण्डपम्प के कारण पानी के लिए जद्दोजहद देखी जा सकती है। कमोबेश यही हाल अन्य इलाकों का है ये तो सिर्फ एक उदाहरण भर है, भूजल स्तर नीचे जाने से बड़ी संख्या में हैण्डपम्पों के विद्रोह की शुरुआत हो गई है।