
Suspended for negligence in training of polling team
चित्तौड़गढ़. लोकसभा चुनाव में ताल ठोकने वाले अधिकांश प्रत्याशी प्रदेश में जमानत तक नहीं बचा पाते हैं। वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में 249 प्रत्याशी चुनावी रण में उतरे थे। उनमें से 198 प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो गई थी। वहीं 164 प्रत्याशी ऐसे थे, जिनको दस हजार से भी कम मत मिले।
वहीं 20 हजार से कम मत प्राप्त करने वाले 26 प्रत्याशी रहे थे। जबकि पचास हजार से कम मत प्राप्त करने वाले प्रत्याशियों की संख्या 8 रही। खास बात यह है कि जिन प्रत्याशियों की जमानत जब्त हुई, उनमें से कई प्रत्याशियों के एक हजार से भी कम मत थे।
लोकसभा चुनाव में सामान्य वर्ग के प्रत्याशी को 25 हजार रुपए और एससी-एसटी वर्ग के प्रत्याशी को 12 हजार 500 रुपए जमानत के रूप में जमा करवाने होते है। चुनाव आयोग के नियमानुसार कोई प्रत्याशी लोकसभा सीट पर पड़े कुल मतों के 1/6 मत हासिल नहीं कर पाता तो उसकी जमानत जब्त कर ली जाती है। उदाहरण के लिए यदि किसी सीट पर एक लाख वोट पड़े हैं और प्रत्याशी को 16 हजार 666 से कम मत मिलते हैं तो उसकी जमानत राशि जब्त हो जाती है।
यदि कोई प्रत्याशी 1/6 से ज्यादा मत प्राप्त करता है तो उसे जमानत राशि लौटा दी जाती है। चुनाव जीतने वाले को उसकी जमानत राशि वापस कर दी जाती है। भले ही उसे कुल मतों के 1/6 तय मत प्राप्त नहीं हो। यदि मतदान से पहले किसी प्रत्याशी की मौत हो जाती ह, तो उसके परिजनों को राशि वापस दी जाती है। प्रत्याशी का नामांकन रद्द होने या नामांकन वापस लेने पर भी जमानत राशि वापस दी जाती है।
चित्तौडग़ढ़ 8
भीलवाड़ा 2
उदयपुर 7
बांसवाड़ा 2
राजसमंद 7
गंगानगर 7
बीकानेर 7
चूरू 10
झुंझुनू 10
सीकर 10
जयपुर ग्रामीण 6
जयपुर 22
अलवर 9
भरतपुर 6
करौली-धौलपुर 3
दौसा 9
सवाई माधोपुर 6
अजमेर 5
नागौर 11
पाली 6
जोधपुर 8
बाड़मेर 5
जालोर 13
कोटा 13
झालावाड़-बारां 5
Published on:
09 Apr 2024 02:57 pm

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