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नस्लें बर्बाद, सिर्फ ‘वेे ही आबाद

नौजवानों की रगों में घुलता स्मैक, अफीम और डोडा चूरे का नशा पीढिय़ों और नस्लों को बर्बाद कर रहा है। चित्तौडग़ढ़ में भी यह नशा कई घर उजाड़ चुका है। आबाद सिर्फ 'वे ही हो रहे हैं, जो प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से इस काले कारोबार से जुड़े हुए हैं। पुलिस से तस्करों की सांठगांठ अब नई बात नहीं रही।

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नस्लें बर्बाद, सिर्फ 'वेे ही आबाद

नस्लें बर्बाद, सिर्फ 'वेे ही आबाद

चित्तौडग़ढ़
नौजवानों की रगों में घुलता स्मैक, अफीम और डोडा चूरे का नशा पीढिय़ों और नस्लों को बर्बाद कर रहा है। चित्तौडग़ढ़ में भी यह नशा कई घर उजाड़ चुका है। आबाद सिर्फ 'वे ही हो रहे हैं, जो प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से इस काले कारोबार से जुड़े हुए हैं। पुलिस से तस्करों की सांठगांठ अब नई बात नहीं रही।
मेवाड़ और मालवा ऐसे क्षेत्र हैं, जहां अफीम की खेती के सर्वाधिक पट्टे हैं। चित्तौडग़ढ़ जिले में भी करीब पन्द्रह हजार किसानों को पट्टे मिले हुए हैं, जो बरसों से अफीम की खेती करते आए हैं। इन्हीं खेतों से डोडा चूरा अलग-अलग माध्यम से मारवाड़ सहित हनुमानगढ और गंगानगर होते हुए पंजाब तक पहुंचता है। हरियाणा के कई इलाकों तक भी मेवाड़ और मालवा से डोडा चूरे की तस्करी कई बार सामने आ चुकी है। विडंबना यह है कि नशे से मुक्ति दिलवाने के लिए राज्य सरकार जहां प्रदेश के करीब अठारह जिलों में नया सवेरा योजना चला रही है तो दूसरी तरफ सरकार में बैठे जिम्मेदार पिछले करीब तीन साल से डोडा चूरा नष्ट करवाना ही भूल गए। यही वजह है कि डोडा चूरे की तस्करी पहले के मुकाबले बढी है। सूत्रों की मानें तो जितना डोडा चूरा पुलिस पकड़ रही है, उससे कई ज्यादा डोडा चूरे की खेप प्रदेश के विभिन्न जिलों सहित हरियाणा और पंजाब तक पहुंच रही हैं।
सूत्र बताते हैं कि जिले में डोडा चूरे की तस्करी को लेकर चेन सिस्टम काम कर रहा है। कुछ लोग किसानों को विश्वास में लेकर औने-पौने दामों में डोडा चूरा खरीदकर एकत्रित करने का काम करते हैं। इनके जरिए यह डोडा चूरा तस्करों के दलालों तक पहुंचता है और फिर तस्करों तक इसकी खेप पहुंच जाती हैं। तस्करों से पुलिस की मिलीभगत पहले भी सामने आ चुकी है, जिसकी वजह से कई सिपाहियों को नौकरी से हाथ धोना पड़ा था। डूंगरपुर में शराब तस्करों से मिलीभगत का खुलासा होने के बाद कुछ पुलिसकर्मियों की सांठगांठ अब भी तस्करों से होने की बात एक बार फिर पुलिस मुख्यालय तक पहुंचने की बात सामने आ रही है, जिसकी गोपनीय जांच शुरू होने की सुगबुगाहट है।

तीन साल का डोडा चूरा अब मिलना संभव नहीं
अफीम उत्पादक किसानों की मानें तो उन्होंने घरों में रखा डोडा चूरा सड़-गल जाने के कारण नष्ट कर दिया। दूसरा पहलु यह है कि जब किसान डोडा चूरा नष्ट कर चुके हैं तो फिर पुलिस जो डोडा चूरा पकड़ रही है, वह कहां से आया। कुल मिलाकर सच यही है कि एनडीपीएस की धारा उन्नतीस 'आबादÓ होने का जरिया बनकर रह गई है।

किसानों की यह मंशा
अफीम की खेती से जुड़े किसानों की मांग है कि उन्हें डोडा चूरा नष्ट करने के बदले उचित मुआवजा दिया जाए और नारकोटिक्स विभाग की ओर से खरीदी जाने वाली अफीम का भाव बढाया जाए, ताकि किसानों को नुकसान नहीं हो। उचित मुआवजे पर किसान खुद डोडा चूरा नष्ट करवाने को तैयार है पर सरकार पिछले तीन साल से इस संबंध में कोई निर्णय नहीं कर पाई है। यही वजह है कि डोडा चूरा नष्ट नहीं होने के कारण इसकी तस्करी बढ गई है।

नशे से पनप रहे अपराध
चित्तौडग़ढ़ जिले में ज्यादातर नशा स्मैक का किया जाता है। स्मैक की तलब पूरी करने के लिए स्मैकची चोरियों सहित कई छोटे-मोटे अपराधों को अंजाम दे रहे हैं। यहां तक कि मकानों के बाहर लगी टोंटियां भी चुराने से बाज नहीं आते।


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