
चित्तौड़गढ़ के बड़ीसादड़ी में ‘नेहा तंवर’ बनी ‘धृशाप्रभा’। फोटो पत्रिका
Chittorgarh : धर्म और अध्यात्म की पावन धरा चित्तौड़गढ़ के बड़ीसादड़ी में सोमवार को ऐतिहासिक और आध्यात्मिक संगम देखने को मिला। अष्ट दिवसीय दीक्षा महोत्सव के अंतिम सोपान पर, पंजाब की मुमुक्षु नेहा ने सांसरिक मोह-माया का त्याग कर ‘जिनशासन’ की कठिन डगर पर अपने कदम बढ़ा दिए हैं।
ओजस्वी वक्ता चिराग मुनि के आशीर्वाद से संपन्न हुई इस विधि-विधान पूर्ण दीक्षा ने पूरे वातावरण को वैराग्य के रंग में सराबोर कर दिया। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
कल तक जो साधिका संसार के लिए ‘नेहा’ थी, संयम पथ अपनाते ही अब वे ‘नव दीक्षिता धृशाप्रभा’ के नाम से जानी जाएंगी। दीक्षा स्थल पर पहली बार मंगल पाठ सुनाकर उन्होंने अपने नव-संयमी जीवन का श्रीगणेश किया।
इसी वट वृक्ष के नीच बड़ी सादड़ी की एक बहन को दीक्षा प्रदान की गई थी। 15 वर्ष अंतराल के बाद, उसी ऐतिहासिक दीक्षा वटवृक्ष के नीचे मुमुक्षु नेहा को दीक्षा प्रदान की गई। जैसे ही दीक्षा की रस्में पूरी हुईं, पूरा पांडाल गुरुदेव जैन दिवाकर और गुरुदेव धर्म मुनि के गगनभेदी जयकारों से गूंज उठा। हजारों की संख्या में उपस्थित श्रावक-श्राविकाओं की आंखें इस अलौकिक दृश्य को देखकर हर्ष और भक्ति से भर आईं।
Updated on:
06 Jan 2026 01:58 pm
Published on:
06 Jan 2026 12:58 pm
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