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Rajasthan Highway Update: टेंडर और सर्वे के बाद भी अटका फोरलेन का काम, आखिर कब बनेगा राजस्थान का यह हाईवे?

Rajasthan Fourlane Project: राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले में टेंडर होने के बाद सर्वे भी पूरा हो चुका है। लेकिन, अभी भी फोरलेन सड़क का काम अटका हुआ है।

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चित्तौड़गढ़

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Anil Prajapat

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पवन अग्रवाल

Feb 25, 2026

road news

क्षतिग्रस्त सड़क। फोटो: पत्रिका

Rajasthan Road News: चित्तौड़गढ़/चिकारड़ा। मंगलवाड़ से निंबाहेड़ा तक का सफर इन दिनों जान जोखिम में डालकर पूरा करना पड़ रहा है। कहने को यह एक राजमार्ग है, लेकिन हकीकत में यह गड्ढों का अजायबघर बन चुका है।

कागजों में इस मार्ग को फोरलेन बनाने की प्रक्रिया दौड़ रही है, टेंडर हो चुके हैं, सर्वे के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन धरातल पर एक ईंट तक नहीं सरकी है। आखिर विकास की यह फाइल किस तिजोरी में बंद है, इसका जवाब देने वाला कोई नहीं है।

सर्वे के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति

पूर्व सरपंच पति राधेश्याम सोनी का कहना है कि फोरलेन की प्रक्रिया लंबे समय से जारी बताई जा रही है। टेंडर होने के बाद सर्वे भी पूर्ण होने की बातें कही गईं, लेकिन काम शुरू होने का नाम नहीं ले रहा। विभागीय सुस्ती का आलम यह है कि आमजन को यह तक नहीं पता कि निर्माण कार्य किस मोड़ पर आकर रुक गया है। यह पूरी प्रक्रिया सरकारी सिस्टम के पेट की बात बनकर रह गई है, जो बाहर आने का नाम नहीं ले रही।

181 बनी शो-पीस, विभाग ने मोड़ा मुंह

सरकारी महकमों की संवेदनहीनता का आलम यह है कि ग्रामीणों की जायज मांगों को भी रद्दी की टोकरी में डाल दिया जाता है। ग्रामीण हिम्मत लाल चौधरी बताते हैं कि सड़कों की बदहाली को लेकर कई बार प्रार्थना पत्र दिए गए, लेकिन उन्हें गोल-गोल घुमा दिया जाता है। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 181 भी अब जवाबदेही से पल्ला झाड़ रही है। अधिकारी केवल आश्वासनों की घुट्टी पिला रहे हैं, जबकि सड़क पर बेमौत जिंदगियां दम तोड़ रही हैं।

पत्रिका के सीधे सवाल

1. जब टेंडर और सर्वे की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, तो निर्माण कार्य शुरू करने के लिए किस मुहूर्त का इंतजार किया जा रहा है?
2. बदहाल और जानलेवा सड़क पर भारी-भरकम टोल वसूलना किस नियम के तहत न्यायोचित है?
3. 181 और विभागीय स्तर पर शिकायतों को रद्दी मानने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई कब होगी?

    मौत के गड्ढे, जिम्मेदार मौन

    सड़क की हालत मरघट रोड जैसी है। रोजाना हजारों वाहन चालक अपनी जान हथेली पर रखकर यहां से गुजरते हैं। प्रशासन और टोल कंपनी की मिलीभगत जनता पर भारी पड़ रही है। जब तक सड़क सुधरती नहीं, टोल बंद होना चाहिए।
    -राधेश्याम सोनी, पूर्व सरपंच पति

    हम गुहार लगा-लगाकर थक चुके हैं। सरकारी सिस्टम बहरा हो गया है। 181 पर शिकायत करने के बाद भी समाधान के बजाय टालमटोल भरा जवाब मिलता है। क्या विभाग किसी बड़े हादसे के बाद जागेगा?
    -हिम्मत लाल चौधरी, ग्रामीण

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