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बेगूं में मिले पुरातन सभ्यता के संकेत मिले

जिले के बेगूं में दक्षिण से कदमली के जंगल से ब्राह्मणी नदी का उद्गम होकर यह भैंसरोडगढ़ के समीप चंबल नदी में मिलती है। किसी समय बारह मास बहने वाली यह नदी बरसाती नदी बन गई है। इस नदी किनारे ईसा से पूर्व की सभ्यता होने के संकेत मिले हैं।

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बेगूं में मिले पुरातन सभ्यता के संकेत मिले

बेगूं में मिले पुरातन सभ्यता के संकेत मिले

चित्तौडग़ढ़
बेगूं के युवा अरविंद भट्ट, संजय शर्मा आदि ने सांसद सीपी जोशी को बताया कि ब्राह्मणी नदी के उद्गम कदमली से लेकर भैंसरोडगढ़ तक इस नदी के किनारे पुरातन सभ्यता के प्रमाण नजर आते हैं। इसकी पुरातत्व विभाग जांच करें। सांसद जोशी ने सर्वे करने के पुरातत्व विभाग को पत्र लिखा है। सांसद की मांग पर पुरातत्व विभाग जोधपुर से अधिकारी सर्वे कार्य के लिए बेगूं पहुंचे। पुरातत्व विभाग के जांच अधिकारी ने बेगूं के बनेकड़ माता मंदिर, नीलकंठ मंदिर के समीप देव नारायण मंदिर के टीले, जूनी बेगंू के बावड़ा एवं मठनुमा खंडहर आदि कई स्थानों का सर्वे किया। यहां से कई प्रकार के पुरातन अवशेष एकत्रित किए हैं।
पुरातन शिलालेख
पुरातत्व विभाग की टीम को बनेकड़ माता मंदिर के समीप पुरातन शिलालेख मिला। यह शिलालेख पाली या प्राकृत भाषा में लिखा होने की संभावना है। अनुमान है कि यह शिलालेख ईसा से 300 वर्ष पुराना हो सकता है। शिलालेख के अध्ययन के लिए विशेषज्ञ के पास इसके चित्र भेजे गए हैं। अध्ययन पश्चात विशेषज्ञ ही बता पाएंगे कि क्या लिखा है एवं यह कितना पुराना है।
खंडहर में मठ
जूनी बेगूं में एक बावड़ी एवं बावड़ा बना हुआ है। बावड़ा के समीप एक टीले पर खंडहर है। यह खंडहर चारों ओर से झाडिय़ों से ढंका हुआ है। खंडहर बड़े भारी पत्थरों के लेंटर से बना हुआ है। इसके द्वार पर लगे पत्थर पर नक्काशी की गई है। नक्काशी में शेर, हाथी एवं नर्तक नर्तकी खुदे हुए हैं। अनुमान लगाया जा रहा कि मठ का यह ऊपरी भाग है। विभाग इसकी खुदाई करें तो अंदर भी भवन निकलने का अनुमान लगया जा रहा है।
कदमाली से हुई शुरूआत
बेगूं की ब्राह्मणी नदी का कदमाली से उद्गम हुआ यही पुरातन सभ्यता के शरुआत होने के संकेत है। वर्तमान में ब्राह्मणी नदी पर 90 के दशक में कदमाली बांध बनवाया गया। इसी स्थान पर पूर्व में बांध बना हुआ था। नदी और समाज के बीच कई हजारों साल पुराना मजबूत और आत्मीय रिश्ता रहा है। अब तक का इतिहास देखें तो तमाम सभ्यताएं नदियों के किनारे ही पली बढ़ी हैं। नदियों के कारण ही सैकड़ों सालों तक उनका अपना अस्तित्व भी बना रहा। नदियों में आए उफान से इनका अस्तित्व समाप्त भी हुआ। कदमाली का पुराना बांध एवं इसके निर्माण में लगी ईंटंों से इसकी पुरातन समय काल की गणना की जा सकती है। ब्राह्मणी नदी के किनारे एक हजार से 4000 हजार वर्ष पूर्व गांव बसे हुए थे। पुरानी सभ्यता के संकेत बेगंू सहित भैंसरोडगढ़ तक कई जगह पर देखने को मिल सकते हैं।
मौर्य काल से लेकर प्रतिहार काल के सिक्के मिले
जूनी बेगूं में मकानों के जीर्णोद्धार के दौरान कई घरों में पुरातन अवशेष, मिट्टी के बर्तन, मिट्टी के घड़ों में सोने, चांदी एवं तांबे के सिक्के मिले। पुरातत्व विभाग की टीम को एक व्यक्ति ने नाम न बताने की शर्त पर पुराने तांबे के सिक्के लाकर बताए। कुछ लोगों ने बताया कि मकान के जीर्णोद्धार के दौरान ताम्र बर्तन, पाषाण काल के मिट्टी के बर्तन में सिक्के, अस्थियां एवं अन्य सामान निकले। लोगों ने अस्थियों एवं मिट्टी के बर्तनों को नदी में प्रवाहित कर नष्ट कर दिया। कई मकानों की नींव खुदाई के दौरान पूर्व के मकानों के अवशेष मिले हैं।
पुरानी ईंट एवं बर्तन के अवशेष एकत्रित किए
देवनारायण चबूतरे के समीप कुछ समय पूर्व मिट्टी की खुदाई की गई थी। इस स्थान से पुरातत्व विभाग के अधिकारी ने ईंट एवं मिट्टी के टूटे हुए बर्तन के अवशेष एकत्रित किए हैं। मिट्टी के बर्तनों की केमिकल जांच के बाद पता चलेगा कि ये किस समय के है।
बेगूं में ब्राह्मणी नदी के किनारे पुरातन सभ्यता बसी होने की जानकारी के बारे में बेगंू के जागरूक लोगों ने बताया। पुरातत्व विभाग को इसका सर्वे कराने के लिए पत्र लिखा था। जांच टीम को कोई पुख्ता जानकारी मिलती है तो इसकी विस्तृत जांच करवाई जाएगी।
सीपी जोशी, सांसद, चित्तौडग़ढ़


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