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दो घंटे में मिल रही टीबी रिपोर्ट, दवा के असर का लगता पता, 1400 से अधिक मरीजों को मिलेगी राहत

चित्तौड़गढ़. देश को टीबी (क्षय) से मुक्त करने के लिए अभियान चल रहा है। इसे अधिक प्रभावी करने के लिए जिले के 12 चिकित्सा संस्थान में सीबीनॉट व ट्रूनॉट मशीन लगाई गई हैं जिसकी मदद से महज दो घंटे में पता चल जाएगा कि रोगी को टीबी रोग है या नहीं। इसके साथ ही मशीन बताती है कि मरीज की इम्यूनिटी कितनी है और दवा कार्य कर रही है या नहीं।

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चित्तौड़गढ़. देश को टीबी (क्षय) से मुक्त करने के लिए अभियान चल रहा है। इसे अधिक प्रभावी करने के लिए जिले के 12 चिकित्सा संस्थान में सीबीनॉट व ट्रूनॉट मशीन लगाई गई हैं जिसकी मदद से महज दो घंटे में पता चल जाएगा कि रोगी को टीबी रोग है या नहीं। इसके साथ ही मशीन बताती है कि मरीज की इम्यूनिटी कितनी है और दवा कार्य कर रही है या नहीं।

जिले के 12 चिकित्सा संस्थान में लगाई है सीबीनॉट व ट्रूनॉट मशीन

डॉ. राकेश भटनागर, जिला क्षयरोग अधिकारी, चित्तौड़गढ़ ने बताया कि टीबी जांच के लिए जिले को सीबीनॉट व ट्रूनॉट मशीनें मिली है। जिले के 12 संस्थानों में यह मशीनें लगाई हैं। फिलहाल कपासन में मशीन संचालित नहीं हो पाई है। इन मशीनों से टीबी के उन्मूलन में काफी मदद मिल रही है।


इन अस्पतालों में लगी हैं सीबीनॉट मशीन

● चित्तौडग़ढ़
● निम्बाहेड़ा
● कपासन
● बेगूं
● बड़ीसादड़ी


जिले के इन अस्पतालों में लगी हैं ट्रूनॉट मशीन


● चित्तौड़गढ़
● भदेसर
● राशमी
● गंगरार
● डूंगला
● रावतभाटा
● भूपालसागर

सीबीनॉट मशीन मरीज पर कौन सी दवा प्रभावी होगी, लगाएगा पता


इस मशीन में मरीज का बलगम लेकर जांच पर एक बार में ही पता लगाया जाता है कि उसे सामान्य टीबी है या एमडीआर (भारी टीबी)। साथ ही मरीज पर कौनसी दवा प्रभावी रहेगी, यह भी बताती है।

ट्रूनॉट मशीन मरीज पर दवा के असर का लगाएगा पता


इस मशीन में दो बार में जांच करनी पड़ती है। पहली स्लाइड से सामान्य टीबी का पता करते हैं। वह पॉजिटिव होने पर दूसरी जांच एमडीआर टीबी की जाती है। इससे भी दवा के मरीज पर असर के प्रभाव का पता लग जाता है।

जिले में अभी 1400 से अधिक टीबी के मरीज

इस वक्त जिले में 1400 से अधिक टीबी के मरीज हैं। ऐसे में मशीन के आने से जिले के 1400 से अधिक टीबी मरीजों को राहत मिलेगी। मशीन के आने सें पहले कई बार मरीज के छह माह (टीबी का पूरा कोर्स) लेने के बाद ही पता लगता था कि दवा असर नहीं कर रही। ऐसे में रोगी के दवा लेने की अवधि बढऩे के साथ रोग भी बढ़ जाता था। दूसरी परेशानी यह थी कि जांच के सेम्पल पाली अस्पताल में आते थे। जिनकी जांच होकर जाने में भी देरी लगती थी।

टीबी रोग के लक्षण


● मरीज का वजन लगातार कम होना और थकान महसूस होना।
● बुखार आना, सर्दी लगाना और रात में पसीना आना।
● लगातार खांसी चलना।
● खांसी के साथ खून निकलना।

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