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मेवाड़-मालवा की अफीम से मारवाड़ में महंगी हो रही मनुहार

मारवाड़ में वार-त्योंहार, शादी समारोहों और चुनावों में मनुहार का जरिया बनने वाली अफीम और डोडा चूरा की मनुहार अब महंगी होती जा रही है। इसकी खास वजह तस्करों की धर-पकड़ में तेजी आना है।

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मेवाड़-मालवा की अफीम से मारवाड़ में महंगी हो रही मनुहार

मेवाड़-मालवा की अफीम से मारवाड़ में महंगी हो रही मनुहार

चित्तौडग़ढ़
मारवाड़ में वार-त्योंहार, शादी समारोहों और चुनावों में मनुहार का जरिया बनने वाली अफीम और डोडा चूरा की मनुहार अब महंगी होती जा रही है। इसकी खास वजह तस्करों की धर-पकड़ में तेजी आना है।
मेवाड़ और मालवा में बड़ी संख्या में किसानों को अफीम की खेती के पट्टे जारी किए हुए हैं। ऐसे में अफीम का उत्पादन भी यहां अच्छा होता है। इन इलाकों से मारवाड़ के कई इलाकों सहित हरियाणा और पंजाब तक तस्करी के जरिए अफीम और डोडा चूरा की खेप पहुंचती रही है। पिछले करीब एक दशक से मारवाड़ में जन्म, मरण और परण और चुनाव के मौकों पर मेहमानों की मनुहार का चलन काफी बढ गया है। समाजों की जाजम पर होने वाली इस मनुहार को लेकर कई बार नेता भी चर्चा में आए बिना नहीं रहे। पुलिस ने मेवाड़ और मालवा के विभिन्न इलाकों में अब ऐसे मार्ग भी चिन्हित कर लिए हैं, जिन मार्गों से होकर मादक पदार्थों की तस्करी की आशंका रहती है। पुलिस ने ऐसे मार्गो पर नाकाबंदी को भी मजबूत बनाया है। जिले में नियमित रूप से नाकाबंदी के साथ पुलिस ने खुफिया तंत्र को भी मजबूत बनाया है, ताकि अवैध धंधों की रोकथाम के साथ ही अपराधियों की धर-पकड़ की जा सके। पुलिस ने मारवाड़ से जुड़े अफीम तंत्र पर शिंकजा कसने के लिए तस्करी से जुड़े अपराधियों की सूची तैयार करने के साथ उन पर खुफिया नजर रखनी शुरू कर दी गई है। ऐसे में पिछले एक-डेढ़ साल में जिले की विभिन्न थाना पुलिस ने अफीम और डोडा चूरा तस्करों के खिलाफ जमकर कार्रवाई की है। बड़ी मात्रा में डोडा चूरा और अफीम पकड़कर तस्करों की गिरफ्तारियां होने से अब तस्करी के जरिए मारवाड़ तक पहुंचने वाली अफीम और डोडा चूरा के भाव भी तस्करी के बाजार में बढ गए हैं।

इस तरह महंगी हो रही मनुहार
सूत्रों की मानें तो मेवाड़ और मालवा में आने वाले तस्करों की ज्यादा मांग अफीम के दूध की रहती है। ऐसा इसलिए कि अफीम के शुद्ध दूध में गुड़ और अन्य पाउडर मिलाकर इसकी मात्रा बढा दी जाती है और मिलावट के बाद मारवाड़ में अफीम बेच दी जाती है। मारवाड़ में जो लोग महंगी कीमत पर अफीम नहीं खरीद पाते, वे डोडा चूरा खरीदकर उससे ही मेहमानों की मुनहार करते है। तस्करी के बाजार में मेवाड़ और मालवा में अफीम का दूध करीब एक से सवा लाख रूपए किलो की दर से उपलब्ध हो जाता है। मारवाड़ पहुंचने तक इसकी कीमत दो से ढाई गुना हो जाती है, वह भी मिलावट के बाद। पुलिस की सख्ती के चलते मारवाड़ में मांग के मुकाबले आपूर्ति में कमी के कारण भी अब पहले के मुकाबले ज्यादा कीमत देकर अफीम और डोडा चूरा उपलब्ध हो रहा है, ऐसे में वहां अब अफीम के बजाय अब डोडा चूरे का पानी तैयार कर मनुहार की जाने लगी है। पिछले दिनों एक स्कूल परिसर में कुछ ग्रामीणों का डोडा चूरा के साथ सोशल मीडिया पर भी वीडियो वायरल हुआ था। डोडा चूरे की कीमतें भी अब तस्करी के बाजार में ज्यादा वसूली जा रही है।

इसलिए शुरू की थी नया सवेरा योजना
मारवाड़ सहित प्रदेश के कई जिलों में अफीम और डोडा चूरे की मनुहार के चलते ही राज्य सरकार ने वर्ष २०१४-१५ में अफीम और डोडा पोस्त का नशा करने वालों को नशा मुक्त करने के लिए राज्य के अजमेर, अलवर, बाड़मेर, बीकानेर, चुरू, श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, जयपुर, जैसलमेर, जालौर, झुंझुनू, जोधपुर, नागौर, पाली, राजसमंद, सीकर और सिरोही जिले में नया सवेरा योजना शुरू की थी, लेकिन इसके भी संतोषजनक परिणाम सामने नहीं आए।
आबकारी विभाग का यह है गणित
आबकारी विभाग के अनुमान के अनुसार राज्य में डोडा पोस्त का नशा करने वालों की संख्या करीब २ लाख १५ हजार ५३२ है। यह व्यसनी साल भर में १७ हजार ३७० क्ंिवटल डोडा चूरा पी जाते हैं।


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