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आचार-संहिता के नाम पर नहीं रोक सकेंगे जनता के काम, टरकाया तो खैर नहीं

लोकसभा चुनाव की आचार-संहिता लग चुकी है। इसके साथ ही कई विभागों में आचार-संहिता का बहाना बनाकर लोगों को टरका है। खासकर निकायों के कार्मिक ऐसा कर रहे हैं।

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Lok Sabha Election 2024 : लोकसभा चुनाव की आचार-संहिता लग चुकी है। इसके साथ ही कई विभागों में आचार-संहिता का बहाना बनाकर लोगों को टरका है। खासकर निकायों के कार्मिक ऐसा कर रहे हैं। इसे देखते हुए स्वायत्त शासन विभाग ने सभी निकायों को निर्देश दिए हैं कि आचार-संहिता का पालन करते हुए लोगों के दैनिक कार्यों को पूरा किया जाए। विभाग ने कुछ कामों की सूची भी निकायों को सौंपी है, जो किए जा सकते हैं। डीएलबी निदेशक की ओर से जारी आदेशों में लिखा गया है कि आचार-संहिता के नाम पर आमजन के दैनिक नियमित कार्य नहीं किए जाते हैं। इसलिए समस्त निकाय दैनिक कार्यों को रोके नहीं। हालांकि, निशुल्क व रियायती दर पर पट्टा जारी करने के लिए विभाग ने निकायों को मना कर दिया है। साथ ही, टेंडर के संबंध में निर्वाचन आयोग से जारी निर्देशों की पालना की जाए।

● नए निर्मित भवन, भवन में तात्विक परिवर्तन संबंधी आदि की स्वीकृति के लिए भवन मानचित्र अनुमोदन दो महीने में करें।

● पूर्व में स्वीकृत आवासीय व व्यावसायिक योजनाओं में नीलामी द्वारा बेचे गए भूखंडों के आवंटी या क्रेता ने पूरा पैसा जमा करा दिया है तो उसे पट्टा जारी किया जाए।

● कृषि भूमि नियमन, निर्माण स्वीकृति, नामांतरण आदि की सक्षम स्वीकृति के बाद पूरी राशि जमा हो गई हो तो पट्टा-स्वीकृति जारी की जाए।

● पूर्व में स्वीकृत विकास कार्य, जिनका काम शुरू हो चुका है, उन्हें जारी रखा जाए।

● प्रस्तावित प्रोजेक्ट्स, निर्माण कार्यों की डीपीआर तैयार करवाना व उनकों परीक्षण करते हुए अनुमोदन या अप्रेजल की कार्रवाई करना

● ड्राइंग, डिजाइन विस्त़त एस्टीमेट तैयार करना

● स्वीकृत कार्य की लागत के आधार पर टेंडर डॉक्यूमेंट तैयार करना व एमओयू का प्रारूप तैयार करना जिला निर्वाचन अधिकारी के निर्देशानुसार तत्कालीन अवश्यकता के अनुसार निर्माण कार्य करवाना

● भूमि विक्रय या नियमन के विधि सम्मत जारी किए गए पट्टों का पंजीचन नहीं होने पर ऐसे पट्टों का पुनर्वेध या नवीनीकरण करके पंजीकरण कराने का काम।

● पट्टों के नामांतरण का काम

● आचार संहिता से प्रभावित नहीं होने वाले अन्य सामान्य प्रकृति के कार्य करें ताकि लोगों को असुविधा नहीं हो।

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