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संवेदनशीलता का पर्याय बनी नारी परिवार का आधार

महिला दिवस सभी बहन, बेटियों और माताओं को ये अहसास कराता हैै कि सृष्टि में उनकी अहम भूमिका है। मानव समाज नारी के बिना अधूरा है। चित्तौड़ की वीर धरा तो नारियों के गौरव का इतिहास बयां करती है। इसी धरा पर वीरता की पर्याय रानी पद्मनी, सेवा च त्याग की पर्याय पन्नाधाय एवं भक्ति का पर्याय बनी मीराबाई जैसी विभूतियां हुई।

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संवेदनशीलता का पर्याय बनी नारी परिवार का आधार

संवेदनशीलता का पर्याय बनी नारी परिवार का आधार


चित्तौडग़ढ़. महिला दिवस सभी बहन, बेटियों और माताओं को ये अहसास कराता हैै कि सृष्टि में उनकी अहम भूमिका है। मानव समाज नारी के बिना अधूरा है। चित्तौड़ की वीर धरा तो नारियों के गौरव का इतिहास बयां करती है। इसी धरा पर वीरता की पर्याय रानी पद्मनी, सेवा च त्याग की पर्याय पन्नाधाय एवं भक्ति का पर्याय बनी मीराबाई जैसी विभूतियां हुई। मेरा मानना है की नारी ईश्वर की सुंदर कृति है और माँ इस मानव जाति में ईश्वर का सबसे सर्वोच्च आविष्कार है जो संवेदनशीलता की पराकाष्टा है। हार्टफूलनेस ध्यान के प्रशिक्षक के रूप में मेरा अनुभव रहा है कि नारी शक्ति में दिव्यता का अंश ज़्यादा होता है और आध्यात्मिक अनुभव की गहराई भी ज़्यादा होती है इसी कारण घर परिवार मे शान्ति सुख और सौहार्द बना रहता है। नारी किसी भी परिवार का आधार होता है। उसके बिना परिवार शब्द ही अधूरा है। जिस घर में महिला अध्यात्म धर्म और ईश्वर परायण होती है उस घर में सदैव सुख समृद्धि प्रेम भक्ति का वातावरण सभी को लाभान्वित करता है। पूरे मानव समाज में नारी को समान दर्जा प्राप्त होना चाहिए जो उसका जन्मजात अधिकार है। वर्तमान समय में नारी के सामने कई तरह की चुनौतियां है और उसे पग-पग पर परीक्षा भी देनी पड़ती है लेकिन एक नारी के नाते मैं इस बात पर गर्व महसूस करती हूं कि सदियों से जब भी नारी की परीक्षा हुई वे उसमें कुंदन की तरह खरी होकर उतरी। हम महिलाओं में ये आत्मविश्वास होना चाहिए कि हम किसी से कम नहीं है और हर चुनौती हम स्वीकार कर सकते है। आज महिला राष्ट्र की रक्षा से बच्चों को संस्कार देने जैसे दायित्व बखूबी निभाती आ रही है।मैं महिला दिवस जैसे शुभ अवसर पर प्रार्थना करती हूं कि हम सब ईश्वर प्रेमी बने और जीवन के मूल लक्ष्य की प्राप्ति करे।
लता मुकेश कलाल, योग साधना प्रशिक्षक चित्तौडग़ढ़


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