एक तरफ प्रदेश में बेहतर चिकित्सा व्यवस्था देने का दावा कर रही है। वहीं दूसरी तरफ स्वास्थ्य महकमे के हालात बुरे हैं। ऐसे ही हालातों से चूरू भी जूझ रहा है। पंडित दीनदयाल उपाध्याय मेडिकल कॉलेज की बात करें तो यहां पर कुल 87 पद रिक्त चल रहे हैं। ऐसे में यहां की चिकित्सा व्यवस्था कैसी हो सकती है। इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।
चूरू. एक तरफ प्रदेश में बेहतर चिकित्सा व्यवस्था देने का दावा कर रही है। वहीं दूसरी तरफ स्वास्थ्य महकमे के हालात बुरे हैं। ऐसे ही हालातों से चूरू भी जूझ रहा है। पंडित दीनदयाल उपाध्याय मेडिकल कॉलेज की बात करें तो यहां पर कुल 87 पद रिक्त चल रहे हैं। ऐसे में यहां की चिकित्सा व्यवस्था कैसी हो सकती है। इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। जानकारी के अनुसार चूरू मेडिकल कॉलेज को लेकर नेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़ ने अतारांकित प्रश्न कर चूरू मेडिकल में पदों से संबंधित जानकारी मांगी थी। जिसमें सरकार की ओर से दिए गए जवाब में चौंकाने वाले आंकड़े नजर आए। चूरू मेडिकल कॉलेज में प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर, सहायक प्रोफसर के कुल 153 में से 87 पद खाली चल रहे हैं। लेकिन सरकार की ओर से इन पदों को भरने की दिशा में कोई काम नहीं कर रही है। सरकार की ओर से दिए गए जवाब के तहत बताया गया कि राजमेस के अधीन चिकित्सा महाविद्यालयों में चिकित्सक संवर्ग में रिक्त पदों को भरने के लिए विज्ञप्ति जारी कर भर्ती प्रक्रिया को अंजाम दिया गया है। 746 पदों की विज्ञप्ति में 364 पदों पर अभ्यर्थियों को नियुक्ति प्रदान की गई है। जिसमें चूूरू मेडिकल कॉलेज भी शामिल है। शेष पदों के लिए भर्ती प्रक्रियाधीन है। वर्तमान में डीबीएच चूरू में पैरा मेडिकल स्टाफ के रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया जारी है।
करोड़ों रुपए स्वीकृत किए, फिर भी...
जानकारी के अनुसार मेडिकल कॉलेज चूरू व इससे संबद्ध चिकित्सालय भवन के निर्माण कार्य के लिए वर्ष 2017-18 में तीन हजार लाख केन्द्रीय अंश1800 एवं राज्य अंश 1200 लाख रुपए का आवंटन किया गया था। वर्ष 2018-19 में कार्य के पेटे राशि आवंटित नहीं की गई। अब तक आवंटन राशि के विरुद्ध तीन हजार लाख रुपए की राशि व्यय की जा चुकी है। गौरतलब है कि 2021-22 तक सरकार की ओर से चिकित्सालयों में उपचार के काम आने वाले उपकरणों के पेटे अब तक 13.35 करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके हैं। इसके बावजूद स्वास्थ्य महकमे के हालात खराब है। इस व्यय राशि में वर्ष 2018-19 से पूर्व के वर्ष की अवशेष राशि भी सम्मिलित है।
पद स्वीकृत कार्यरत रिक्त
प्रोफेसर 25 10 15
एसोसिएट प्रोफेसर 49 16 33
सहायक प्रोफेसर 79 40 39
कुल 153 66 87
चिकित्सा व्यवस्था चरमराई
एक तरफ तो मेडिकल कॉलेेज में पद रिक्त चल रहे हैं। जो लोग पद पर कार्यरत हैं। वे समय पर आते नहीं है। चिकित्सा व्यवस्था चरमराई है। सरकार की ओर से दिए गए जवाब से पता चलता है कि सरकार चिकित्सा व्यवस्था के प्रति कितनी गंभीर है।
राजेन्द्र राठौड़, नेता प्रतिपक्ष