
चूरू जेल में गैंगवार की आशंका
चूरू ( मनीष मिश्रा ) . जिला जेल में किसी भी वक्त बड़ी गैंगवार ( Gangwar ) हो सकती है, ऐसी स्थिति में जेल प्रशासन के लिए संभाल पाना नामुकिन हो जाएगा। ये हम नहीं जेल में विचाराधीन बंदियों की संख्या बता रही है। हालत यह है कि इस वक्त जिला जेल में क्षमता से अधिक बंदी बंद है। इसमें सामान्य अपराधों सहित अलग-अलग गैंगों से जुड़े हुए खूंखार अपराधी है। जो कि सुरक्षा में लगे प्रहरियों के लिए बड़ी चिंता का कारण बने हुए हैं।
परेशान करने वाली बात यह भी है कि खूंखार अपराधियों को रखने के लिए जेल ( churu jail ) में अलग से कोई सेल भी नहीं है। सूत्रों की माने तो चूरू जेल में बंदियों को रखने की क्षमता केवल १६५ की है, लेकिन वर्तमान में यहां पर ३०३ बंदी बाड़े में बंद हैं। विचाराधीन बंदियों में हनुमानगढ़ से आया इरफान, गंगानगर से जगदीश उर्फ जग्गा, जयपुर से इमरान उर्फ मोगली, बीकानेर से बिरमा राम, गंगानगर में बड़ी गैंग से तालुक्क रखने वाला चेयरमैन महेन्द्र सहित श्रवण बुडानिया, वीरेन्द्र चारण, सुनील, मुकेश, सरीके खतरनाक अपराधी बंद है।
दिलचस्प बात यह है कि बीकानेर जैसी सुरक्षित जेल ( Bikaner Jail ) होने के बाद भी खूंखार बंदियों में से कईयों को चूरू जैसी छोटी जेल में ट्रांसफर किया गया है। जो कि सुरक्षा को लेकर कई तरह के सवाल खड़े कर रहा है। रविवार को ही पुरानी रंजिश के चलते एक गुट के बंदियों ने दूसरे बंदियों पर जानलेवा हमला कर दिया। वहां मौजूद जेल प्रहरियों ने बड़ी मुश्किल से उन्हें अलग कराया। बाद में जानलेवा हमले में घायल दो बंदियों को सुरक्षा कर्मी इलाज के लिए राजकीय डीबी अस्पताल लेकर पहुंचे।
केवल २० सुरक्षा कर्मी, जिसमें आधी महिलाएं
जेल सूत्रों की माने तो ३०३ विचाराधीन बंदियों की सुरक्षा के लिए स्वीकृत २४ के मुकाबले महज २० कर्मचारी तैनात हैं, जिसमें दस महिलाएं शामिल हैं। बंदियों में किसी तरह का झगड़ा होने पर सुरक्षा की जिम्मेदारी पुरुष सुरक्षा कर्मियों पर आ जाती है। महिलाओं को हार्डकोर्ड अपराधियों के बाड़े के आस-पास नहीं भेजा जाता। दूसरी तरफ अपराधिक पृष्ठभूमि होने से महिलाओं को हार्ड ड्यूटी कम से कम दी जाती है।
फिलहाल खूंखार बंदियों के साथ में ही सामान्य अपराध करने वाले बंदियों को रखा जाता है। जो कि सामान्य बंदियों को डराते-धमकाते हैं।पहले कई मामलों में बंदियों की ओर से आदतन अपराधियों के परेशान करने व दबाव डालकर रुपए मंगवाने के मामले प्रदेश में आ चुके हैं। नियमानुसार दस बंदियों पर एक सुरक्षा कर्मी होना चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। जेल प्रशासन की ओर से उच्चाधिकारियों को समस्या से अवगत कराया जा चुका है, लेकिन सुनवाई नहीं होने से लगता है कि अधिकारी किसी बड़े गैंगवार होने का इंतजार कर रहे हैं।
कार्यवाहक जेल अधीक्षक चूरू रामचंद्र शर्मा के मुताबिक फिलहाल जेल में क्षमता से अधिक बंदी है, इसमें दूसरे जेल से ट्रांसफर होकर आए हार्डकोर अपराधी भी शामिल है।जेल प्रहरियों की संख्या कम है, और अधिक कर्मचारी देने के लिए विभाग के उच्चाधिकारियों को समय-समय पर पत्र लिखा जाता है।
Published on:
26 Nov 2019 02:58 pm
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