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लोक सांस्कृतिक परंपराओं का अनुष्ठान है चूरू उत्सव, बीच बीच में आया ठहराव, शोभायात्रा के साथ उत्सव का आगाज

पर्यटन विकास और लोक कला को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से शुरू किए गए चूरू उत्सव में स्थानीय लोक कला संस्कृति, परंपरागत खेल, संगीत, साहित्य और कला न केवल जीवंत बने बल्कि लोक कलाकारों को एक संशक्त मंच प्रदान करने के लिए आयोजित इस उत्सव के माध्यम से यहां के लोग राजस्थान और देश की कला को जाने इसका भी प्रयास किया गया।

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चूरू.थळी अंचल का वर्ष 1996 में शुरू होनेवाले चूरू उत्सव में भले ही बीच में ठहराव आया लेकिन पिछले साल फिर शुरू हुआ उत्सव एक बार फिर आयोजित हो रहा है। आमजन का मानना है कि यह उत्सव मरुस्थलीय जिले का मुख्य और बड़ा उत्सव बनाए रखने के किए जा रहे प्रयास यदि निरंतर जारी रहते हैं तो इससे यहां की न केवल लोक संस्कृति को संबल मिलेगा बल्कि पर्यटकीय विकास को एक नई दिशा देगा।

थळी अंचल की लोक कला संस्कृति, परंपरागत खेल, लोक रीति रिवाजो, साहित्य और यहां की परंपराओं को जीवंत बनाए रखने की उद्देश्य से वर्ष 1996 में आयोजित किया गया। लेकिन करीब तीन साल तक चले इस आयोजन का सिलसला टूट गया। 2008 में चूरू उत्सव का फिर आगाज हुआ। तत्कालीन जिला कलक्टर रहे अर्जुनराम मेघवाल ने उत्सव के आयोजन के थमे रथ के पहिए को फिर गतिमान किया। लेकिन अगले साल फिर इसे विराम लग गया।

उत्सव के लिए अ नाम राशी का संयोग
थळी अंचल में चूरू उत्सव (Churu Festival) के लिए अ नाम राशी के जिला कलक्टर का एक अभिनव संयोग रहा। वर्ष 1996 में यहां कलक्टर रहे अमरचंद भट्ट ने चूरू उत्सव की नींव रखी। तीन साल बाद बंद हुए चूरू उत्सव को 2008 में कलक्टर रहे वर्तमान केन्द्रीय कानून मंत्री अर्जुनराम मेघवाल ने फिर शुरू किया। लेकिन यह रफ्तार नहीं पकड़ पाया। 2025 में जिला कलक्टर अभिषेक सुराणा ने चूरू उत्सव फिर शुरू किया और इस साल भी सुराणा के निर्देशन में उत्सव 19 मार्च से शुरू हो रहा है जो 21 मार्च तक चलेगा।

पर्यटन विकास लोक कला को प्रोत्साहन
पर्यटन विकास और लोक कला को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से शुरू किए गए चूरू उत्सव में स्थानीय लोक कला संस्कृति, परंपरागत खेल, संगीत, साहित्य और कला न केवल जीवंत बने बल्कि लोक कलाकारों को एक संशक्त मंच प्रदान करने के लिए आयोजित इस उत्सव के माध्यम से यहां के लोग राजस्थान और देश की कला को जाने इसका भी प्रयास किया गया।

इस बार बागला स्कूल मैदान में होगा उत्सव
वर्ष 2026 का चूरू महोत्सव (Churu Mahotsav) स्थानीय बागला स्कूल खेल मैदान और चूरू चोपाटी पर आयोजित होगा। राजस्थान स्थापना दिवस पर जिले की सांस्कृतिक विरासत को उत्सव रूप में मनाए जा रहे चूरू महोत्सव के शुभारंभ पर 19 मार्च को सुबह 07.30 बजे गढ़ परिसर से विरासत कार्निवल यात्रा (शोभायात्रा) निकाली गई। दिनभर विभिन्न प्रतियोगिताएं आयोजित होंगी व सांस्कृतिक संध्या में लोक प्रसिद्ध कलाकार प्रस्तुतियां देंगे।

दो सत्रों में आयोजन
चूरू महोत्सव 2 सत्रों में आयोजित होगा। प्रातः कालीन सत्र में विभिन्न प्रकार की प्रतियोगिताएं जैसे मिस, मिस्टर, मिसेज चूरू प्रतियोगिता, नृत्य प्रतियोगिता होगी। स्पॉट शॉर्ट वीडियो रील, पारंपरिक परिधान, ऊंट सजावट, गायन, कविता पाठ, लोक गीत, मेहंदी, साफा बांधना, वादन, स्पॉट पेटिंग, रसा-कसी, रंगोली तथा चंग-ढप प्रतियोगिता आयोजित होगी। सायंकालीन सत्र में गुरुवार सायं 6.15 बजे से शमा फोक म्यूजिक बैंड जैसलमेर द्वारा राजस्थान लोक संगीत, विश्व प्रसिद्ध ट्रम्पैट प्लेयर आमिर बिहाणी, क्रेजीहॉपर्स व बॉलीवुड सूफी फ्यूजन रॉक बैंड आदि सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देंगे। इसी क्रम में 20 मार्च को सायं 6.15 बजे से चूरू की स्वर कोकिला कोक स्टूडियो फ्रेम भंवरी देवी व डिवाइन लाइव कन्सर्ट की प्रस्तुतियां होगी तथा 21 मार्च को सायं 06.15 बजे से राजस्थानी लोक गायिका सीमा मिश्रा की ओर से शानदार प्रस्तुतियां दी जाएंगी। इसी के साथ 23 मार्च तक बागला खेल मैदान के सामने स्थित चूरू चौपाटी में एक जिला-एक उत्पाद मेला व राजसखी मेले का भी आयोजन किया जा रहा है।

सायंकालीन सत्र में गुरुवार सायं 6.15 बजे से शमा फोक म्यूजिक बैंड जैसलमेर द्वारा राजस्थान लोक संगीत, विश्व प्रसिद्ध ट्रम्पैट प्लेयर आमिर बिहाणी, क्रेजीहॉपर्स व बॉलीवुड सूफी फ्यूजन रॉक बैंड आदि सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देंगे। इसी क्रम में 20 मार्च को सायं 6.15 बजे से चूरू की स्वर कोकिला कोक स्टूडियो फ्रेम भंवरी देवी व डिवाइन लाइव कन्सर्ट की प्रस्तुतियां होगी तथा 21 मार्च को सायं 06.15 बजे से राजस्थानी लोक गायिका सीमा मिश्रा की ओर से शानदार प्रस्तुतियां दी जाएंगी। इसी के साथ 23 मार्च तक बागला खेल मैदान के सामने स्थित चूरू चौपाटी में एक जिला-एक उत्पाद मेला व राजसखी मेले का भी आयोजन किया जा रहा है।

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