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सर्दियों में घरों की बगिया में महक बिखेर मुस्कुरा रहे रंग- बिरंगे फूल

शहर के घरों में इस समय फूल महक कर मुस्कान बिखेर रहे हैं। लोगों ने बताया कि फूल घर के लिए शुभ ही नहीं बल्कि घर की सकारात्मकता को बढ़ा हर कोना खूबसूरत बना देते हैं। इन दिनों घरों में बालकनी, छत, दालान व क्यारियां कई तरह के फूलों से लबरेज नजर आ रही है। धोरों में आपणी योजना के जरिए मीठे पानी की आवक ने हाल ही के इन वर्षों में चूरू समेत जिले के कई कस्बों के घरों में वाटिकाओं के विकसित होने में अहम किरदार निभाया है। बागवानी के शौकीन लोग कम जगह या बालकनी में भी फल, फूल और सब्जियां उगा रहे हैं।

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चूरू. धोरों में आपणी योजना के जरिए मीठे पानी की आवक ने हाल ही के इन वर्षों में चूरू समेत जिले के कई कस्बों के घरों में वाटिकाओं के विकसित होने में अहम किरदार निभाया है। बागवानी के शौकीन लोग कम जगह या बालकनी में भी फल, फूल और सब्जियां उगा रहे हैं। शीत ऋतु रंग- बिरंगे फूलों के खिलने का सबसे अच्छा मौसम है। नवम्बर से लेकर फरवरी तक के चार महिनों में बगीचे व घरों की वाटिकाएं कई प्रजातियों के फूलों से आच्छादित हो जाती हैं। शहर के घरों में इस समय फूल महक कर मुस्कान बिखेर रहे हैं। लोगों ने बताया कि फूल घर के लिए शुभ ही नहीं बल्कि घर की सकारात्मकता को बढ़ा हर कोना खूबसूरत बना देते हैं। इन दिनों घरों में बालकनी, छत, दालान व क्यारियां कई तरह के फूलों से लबरेज नजर आ रही है।

इन प्रजातियों के पनप रहे पुष्प

गेंदा, गुलदाउदी, गुलाब,सूरजमुखी, गुड़हल, पेटूनिया, डहलिया, कैलेंडुला, नैस्टर्टियम, सिनेरेरिया, पॉट मैरीगोल्ड, बोगनवेलिया, केली, जिन्निया, सहित कई प्रजातियों के पौधे सर्दियों के मौसम में घरों में उगाए जा रहे हैं।

तीन सौ रूपए तक के बिक रहे पौधे

शहर के पंखा रोड, गणेश मंदिर चौराहा, पंखा सर्किल स्थित फुटपाथ पर करीब आठ नर्सरियां इस समय सीजलन फूलों के पौधों का कारोबार कर रही है। एक नर्सरी संचालक लखनसिंह ने बताया कि इस समय ग्राहक कच्ची फुलवारी की मांग ज्यादा कर रहे हैं। फूलों के पौधे 60 से 300 रूपए तक बिक रहे हैं। जिसमें सबसे महगें पौधे हाइब्रिड गुडहल व गुलदाउदी के बिक रहे हैं। नर्सरी संचालक अल्लादीन ने बताया कि एक नर्सरी पर दिन भर में औसतन एक हजार से 12 सौ तक के पौधे बिक रहे हैं।

टॉपिक एक्सपर्ट...

बीते दो दशकों में जिले के कई इलाकों में आपणी योजना का मीठा पानी आया है। इससे लोगों में घरों की सुंदरता बढाने की होड़ में प्लांटेशन व गार्डनिंग का शौक उपजा है। लॉजिस्टिक सहुलियत बढने के साथ ही आवागमन के साधनों ने एक से दूसरे शहर की दूरियां कम कर दी हैं। लोग अन्य शहरों से सजावटी व कीमती पौधे लाकर अपने घरों की बगिया को संवार रहे हैं। सर्दियों के दिनों में बड़े शहरों की तर्ज पर धोरों में भी कई प्रजातियों के रंग - बिरंगे फूलों वाले पौधे विकसित होने लगे हैं। इन दिनों में लोग अपने घरों के गार्डन में सीजनल फ्लावर्स उगा रहे हैं। इसका सीधा कारण जलवायु परिवर्तन व लोगों में जागरुकता का बढना है।

डॉ. शेर मोहम्मद, सेनि प्रोफेसर, वनस्पति विज्ञान, चूरू

बोले विशेषज्ञ...

सर्दियों की सीजन में खिलने वाले फूल कई प्रजातियों के कीट पतंगों सहित तितलियों व मधु मक्ख्यिों को आकर्षित करते हैं। ये मौसम मधुमक्खियों के नेस्टिंग का समय होता है। इसमें फूलों की सबसे बड़ी भूमिका होती है। मधुमक्खियों का इस समय फूलों पर ही डेरा होता है। जो कि परागण के लिए सबसे अहम पार्ट है। बदलते समय के साथ रेगिस्तानी इलाके में कई प्रजातियों के फूलों वाले पौधे सार्वजनिक उद्यानों व घरों में पनपने से यहां के इको सिस्टम को बचाने के लिए प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं। धोरों की प्रकृति के लिए ये एक शुभ संकेत है।

डॉ. योगेंद्रसिंह राठौड़, नेचर ऑथर व वन्यजीव विशेषज्ञ, चूरू