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डीबीएच प्रबंधन को 70 प्रतिशत अंक लाने पर प्रतिवर्ष मिलेंगे 40 लाख रुपए

क्वालिटी एशोरेंस के लिए फिर से शुरू की गई कवायद

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चूरू.

अस्पतालों में सुविधाओं को बेहतर बनाने व मरीजों को गुणवत्तायुक्त उपचार दिलाने के लिए शुरू किए गए क्वालिटी एशोरेंस कार्यक्रम में राजकीय डेडराज भरतिया जिला चिकित्सालय ने फिर से कवायद तेज कर दी है। चिकित्सालय टीम की ओर से किए गए स्वत: मूल्यांकन की रिपोर्ट राज्य सराकर के पास भेज दी गई है। क्वालिटी एशोरेंस पुरस्कार के लिए कुल 5000 अंक हैं इसमें से भरतिया को स्वयं के मूल्यांकन में 70 प्रतिशत अंक मिलने पर ही जिला कमेटी व स्टेट कमेटी इसका निरीक्षण करेगी। यदि स्टेर निरीक्षण में अस्पताल ने 70 प्रतिशत अंक प्राप्त कर लिया तो अस्पताल को सुधारने के लिए प्रतिवर्ष 40 लाख रुपए मिलेंगे।

अस्पताल स्टाफ के लिए बढ़ी चुनौती


क्वालिटी एशोरेंस के स्वत: मूल्यांकन में 70 फीसदी अंक लाना सभी प्रभारियों के लिए एक बड़ी चुनौती है। चिकित्सकों व नर्सिंगकर्मियों समेत समस्त स्टॉफ के लिए इस चुनौती को हटकर सामना करना होगा तभी ७० प्रतिशत अंक मिलेंगे।

18 विभागों को बनाना है गुणवत्ता युक्त


अस्पताल के स्वास्थ्य प्रबंधक अनुज शर्मा ने बताया कि जिला अस्पताल में संचालित 18 विभागों में गुणवत्ता पूर्ण कार्य करना होगा। सर्विस प्रोविजन, रोगी के अधिकार, आसीयू, एमटीसी, ब्लड बैंक, रेडियोलॉजी, लेबररूम, आपातकालीन वार्ड, मोर्चरी, ऑपरेशन थिएटर, लैबोरेट्री, एसएनसीयू, शिशु वार्ड, क्लिनिकल केयर, संक्रमण नियंत्रण, क्वालिटी कन्ट्रोल (आईएमआर व एमएमआर), क्वालिटी संकेतक, रोगी के अधिकार, की सुविधाओं को बेहतर बनाना होगा।

चिकित्सकों को बेहतर उपचार, प्रबंधन व देख-रेख का दिया प्रशिक्षण


क्वालिटी एशोरेंस को लेकर चिकित्सालय के चिकित्सकों सहित नर्सिंग व पैरामेडिकल स्टाफ को चिकित्सकीय स्टैंडर्ड के मुताबिक उपचार व सुविधाओं के उपयोग के बारे में उच्च स्तर का प्रशिक्षण दिया जा चुका है। इसके बाद भी यदि 70 फीसदी अंक नहीं अर्जित कर पाएंगे तो यह चूरू के लिए दुर्भाग्य होगा।

क्वालिटी एशोरेंस के स्वत: मूल्यांकन में 70 फीसदी अंक लाने के लिए प्रयास किया जा रहा। सभी वार्ड प्रभारियों को इसके लिए आदेश दिया गया है। यदि तीन दिन में वार्डों में सुधार नहीं हुआ तो संंबंधित चिकित्सक व नर्सिंग वार्ड प्रभारी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। निगरानी के लिए उनकी अध्यक्षता में एक कमेटी भी बनाई गई है।
डा. जेएन, खत्री, अधीक्षक, डीबीएच, चूरू

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