
गाडिय़ां भी रही हैं स्वच्छ भारत मिशन का हिस्सा
चूरू. नगर परिषद चूरू सिर्फ राजनीतिक उठा-पटक ही नहीं, बल्कि बदलते समय का महत्वपूर्ण साक्षीभी रहा है। इसने बहुत से बदलाव होते देखे। पहले नगर पालिका, फिर नगर परिषद, फिर नगर पालिका और उसके बाद अंतत: स्थायी तौर पर नगर परिषद बनने तक इसने जिन बदलावों में भागीदारी निभाई, उसमें आज के 'स्वच्छ भारत अभियानÓ की झलक भी मिलती दिखाई देती है। बुजुर्ग समाजसेवी हनुमान कोठारी ऐसी ही एक व्यवस्था 'गधा गाड़ीÓ का जब जिक्र करते हैं, तो उनकी आंखों की चमक ही बयां कर देती है कि कम जनसंख्या घनत्व वाले इस चूरू नगर परिषद में साफ-सफाई को लेकर तत्कालीन बोर्ड भी किस कदर संजीदा होता था।
आरक्षण से पहले की दास्तां...
पूर्व प्रधानमंत्री स्व. राजीव गांधी के समय पंचायती राज व्यवस्था लागू होने और बाद में १993 तक आरक्षण/महिला आरक्षण का प्रावधान लागू होने से पहले चूरू नगर पालिका/नगरपरिषद में चुने हुए पार्षद ही दो महिला पार्षदों का चुनाव करते थे। 1952 में पहले चुनाव के समय 8 वार्ड थे, जिनसे दो-दो सदस्य चुन कर आते थे। फिर सदस्यों की संख्या कालांतर में 24 और 30 हुई। यह पार्षद बाद में दो महिला पार्षद चुनते थे। समाजसेवी हनुमान कोठारी के मुताबिक जहां तक उन्हें याद है तो अधिकांशत: ये महिला पार्षद सर्वसम्मति से चुन ली जाती थीं। वोटिंग व्यवस्था यूं थी कि हर विधायक को दो वोट करने का अधिकार होता था।
यूं मिली थी चूरू को नगर परिषद
बात सन 1939 की है। बीकानेर रियासत के महाराजा गंगा सिंह के शासन को 50 साल पूरे हुए थे। इस मौके पर स्वर्ण जयंती वर्ष मनाया जा रहा था। महाराजा गंगा सिंह के '50 साल के शासनÓ के अवसर पर उन्होंने पूरी रियासत को कुछ न कुछ उपहारस्वरूप भेंट किया था। चूरू को भी उन्होंने इसी क्रम में नगर परिषद की सौगात दी।
एक आवाज पर निकल आते थे लोग
मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी 'स्वच्छ भारत मिशनÓ की एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में आजकल हम लोग विशेष प्रकार की डिजाईन अथवा किराए पर ली गई ऐसी गाडिय़ों को कचरा संग्रहण और ढोने के काम पर लगे हुए देखते हैं, जिन पर लाउड स्पीकर लगा होता है और स्वच्छ भारत मिशन का थीम सांग बजता रहता है। गौरतलब है कि इन दिनों सुबह घरों से कचरा लेकर लोग इसी थीम सांग को सुन कर ही बाहर निकलते हैं। आपको बताते चलें कि सन 1972 तक ( 1973 से 8 8 तक नगर परिषद/नगर पालिका भंग थी ) आज के स्वच्छ भारत मिशन की तर्ज पर चूरू नगर परिषद/नगर पालिका के इलाकों में ***** गाडिय़ां घूमा करती थीं। जिनमें जुते गर्दभराज के रेंकने की विशेष ध्वनि सुनते ही लोग-बाग कचरा घरों से डिब्बों आदि में लेकर बाहर निकल पड़ते थे और इन ***** गाडिय़ों में डाल देते थे। बाद में 198 8 में जब फिर से नगर परिषद का गठन हुआ, तो इन ***** गाडिय़ों की जगह ट्रैक्टरों ने ले ली। कालांतर में मोदी सरकार पार्ट-1 से कई शहरों और नगर परिषदों/नगर पालिकाओं में विशेष डिजाईन की हुई अथवा ठेकों पर लिए गए वाहनों का प्रयोग इस काम के लिए होने लगा।
Published on:
09 Nov 2019 11:55 am
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