
चूरू. विदा होते सूर्यदेव, छोटी काशी चूरू का गंगा माई मंदिर, ऐतिहासिक सफेद घंटाघर प्रांगण, सर पर पगड़ी बांधे रसिकों की चहल कदमी, गूंजते गीत, घुंघरुओं की खनक और धमाल की अलाप के मुधर स्वर के बीच रविवार शाम ज्योही साकार संस्थान की ओर से आयोजित फागोत्सव का चंग की थाप पर लोक गीत गूंजे तो यहां की लोक संस्कृति साकार हो उठी।
रतनलाल पारख की स्मृति में बसंत कुमार, संजय कुमार पारख कोलकाता के सौजन्य और साकार की इस सजी लोक गीतों की सांझ का अतिथियों ने चंग वादन के साथ शुभारंभ किया तो कलाकारों की गायकी फाल्गुनी राग में घुल गई। श्याम म्यूजिक राजलदेसर के कलाकारों ने जब यह गीत पगल्या री पायलड़ी बाजै हाथों रो चुड़लो कन्हैया जमुना में डर लागै रे भर ल्यादें घड़लो... की प्रस्तुति दी तो दर्शको का मन मयूर नाच उठा।
राजलदेसर के कलाकारों ने लोक गीतों की लड़ियाें में मिश्री को बाग लगादे रसिया नीम की निमोळी म्हाने खारी लागै ... और म्हारे चुड़लै रा सिणगार थारी ओळयू आवै रे सुनाया तो दर्शक दीर्घा में बैठे 90 वर्षीय कलाविज्ञ मोतीलाल सोनी अपने आप को रोक नहीं पाए। उड़यो रे उड़यो ड्योडो जाए .... फाग गीत और धमाल गूंजी तो रसिक दर्शक नाचने से अपने आपको रोक नहीं सकें।
पीयूष शर्मा स्मृति पुरस्कार
शहर के बाजार के बीच साकार हुई लोक संस्कृति (folk culture) में सम्मान की परंपराओं का निर्वहन और अपनों को भी याद किया गया। कार्यक्रम में पत्रकार पीयूष शर्मा स्मृति पुरस्कार पत्रकार राहुल शर्मा को तथा पूर्व सभापति रमाकांत ओझा स्मृति पुरस्कार लोक कलाकार पंकज ओझा को प्रदान कर पूर्व सभापति गोविंद महनसरिया, पूर्व सभापति विजय शर्मा, डॉ. प्रमोद बाजोरिया, एपीआरओ मनीष कुमार, महेंद्र चौबे, विनोद ओझा, हरिप्रसाद पीपलवा तथा भास्कर शर्मा, गुरुदास भारती, बिजेंद्र दाधीच, हनुमान शर्मा आदित्य, राकेश दाधीच, कौशल शर्मा, हेमंत प्रजापत ने सम्मानित किया।
इससे पहले संदीप पाटिल, जगदीश सराफ, संजय सोनी, योगेश गोड़, कानसिंह, पवन शर्मा, सुनील भाऊवाला, अश्वनी व्यास, गौरव दाधीच, हरि मोहता, कमल गोठेचा, राजेश बांठिया, डॉ. शंकर सिंह गोड़, विश्वनाथ राजगुरु, दिनेश स्वामी, गोपी शर्मा, महेश मिश्र, विपिन दाधीच व विजय सारस्वत ने अतिथियों का स्वागत किया। संचालन उमेश दाधीच ने किया।
Published on:
23 Feb 2026 12:17 pm
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