
केंद्र सरकार और राज्य सरकार की गाइडलाइन का स्वास्थ्य विभाग ने निकाला तोड़
चूरू. नौ दिन चले अढ़ाई कोस की कहावत बचपन से पढ़ते आ रहे हैं, लेकिन उसका अर्थ अब बखूबी समझ आ रहा है, जब कोरोना संक्रमण जैसा संकट काल सिर पर है। कोविड-19 संक्रमण से निपटने के लिए जहां केंद्र सरकार की नीति निर्धारक टीम नीतियां बना कर राज्यों को गाइडलाइन जारी कर रही है, तो राज्य के चिकित्सा विभाग उसको कितनी अहमियत दे रहे हैं, इसका अंदाजा आपको चूरू में उन निर्देशों के हालात देख कर साफ लग जाएगा।
यहां बात हो रही है केंद्र सरकार की उस गाइडलाइन की, जिसमें उसने राज्यों को डेडिकेटेड यानी पूरी तौर पर समर्पित दो ऐसी समानांतर चिकित्सा व्यवस्था तैयार करने का निर्देश दिया था।इन निर्देशों में से एक तो है, जिसमें अस्पतालों को कोविड-19 संक्रमित गंभीर मरीजों की इलाज की पुख्ता व्यवस्था करनी है, तो दूसरी एक ऐसा कोविड केयर सेंटर तैयार करने की है, जहां पर असिम्टोमैटिक यानी (लक्षण रहित) कोविड-19 संक्रमित मरीजों को रखे जाने की व्यवस्था की जानी है।
आठ दिन से फाइलों पर जूं तक नहीं रेंगी
अतिरिक्त मुख्य सचिव के यहां से इस संबंध में आदेश आने के बाद कलक्टर संदेश नायक ने इस बारे में सीएमएचओ को नोडल अधिकारी बनाते हुए इसकी समस्त व्यवस्था करने के निर्देश दिए। लेकिन करीब सप्ताह भर तक इससे संबंधित फाइल पर जूं तक नहीं रेंगी। 11 मई को छह ब्लॉक में कोविड केयर सेंटर बनाने की बात कही गई। गौरतलब है कि लगभग यह सभी केंद्र अब तक क्वारंटीन सेंटर के रूप में काम कर रहे थे। हालांकि, तथ्य यह भी है कि इन सेंटर्स की घोषणा तो हो गई, लेकिन केंद्र और राज्य सरकार की ओर से भेजी गई गाइडलाइन की दस फीसदी शर्तों का भी इसमें पालन नहीं किया गया है।
सवाल यह भी है कि अगर इन क्वारंटीन सेंटर्स को ही कोविड केयर सेंटर के तौर पर इस्तेमाल करने की बात तय हो चुकी है, तो क्वारंटीन फैसिलिटी का क्या होगा? पर सीएमएचओ डॉ. भंवरलाल सर्वा कहते हैं कि गाइडलाइन के अनुसार ही भवनों का चिन्हीकरण किया है। रही बात क्वारंटीन सेंटर की, तो उसके लिए गांवों के स्कूलों में और अन्य संस्थानों को चिन्हित किया जा रहा है।
जानकारी के मुताबिक, जयपुर से जारी निर्देशों में देश भर के कोरोना संक्रमित केसों के सर्वे का हवाला दिया गया है, जिसमें आंकड़ों को आधार बनाते हुए कहा गया है कि ऐसा देखा गया है कि लगभग 70 फीसदी कोरोना संक्रमित मामलों में या तो हल्के लक्षण पाए जाते हैं अथवा लक्षण दिखाई ही नहीं देते। ऐसे संक्रमित मामलों को अलग से देखभाल की जरूरत है। लिहाजा प्रत्येक जिले में उस जिले की आवश्यकता अनुसार 500 से 1000 बेड की कुल क्षमता वाले कोविड केयर सेंटर की व्यवस्था की जानी चाहिए। चार मई के राज्य सरकार के आदेश में समयबद्ध तरीके से इन तैयारियों को पूरा करके मुख्यालय को अवगत भी कराना था।
यहां का स्टाफ वहां, वहां का स्टाफ यहां...फिलहाल यही
डॉ. सर्वा दबी जबान में संसाधनों की कमी स्वीकार करते हैं, लेकिन साथ ही वे यह भी जोड़ते हैं कि दरअसल यह 'फ्यूचर प्लानÓ है। आगे आने वाले दिनों में कमियों को दूर करने के अलावा संसाधनों की उपलब्धता की दिशा में भी कोशिश की जाएगी। डेडिकेटेड कोविड केयर सेंटर को लेकर तैयारियों का प्रत्यक्ष उदाहरण सरदारशहर में संक्रमित मिले हावड़ा से आए मरीज का मामला है, जिसे असिम्टोमैटिक होने के बावजूद डीबीएच अस्पताल के आईसोलेशन वार्ड में भर्ती करने की संस्तुति के साथ भेजा गया है, जबकि तय यह है कि लक्षण रहित संक्रमितों को कोविड केयर सेंटर में ही रखा जाएगा और उनकी समुचित देखभाल की जाएगी।
Published on:
13 May 2020 10:26 am

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