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ताले में बंद लाखों का आईसीयू एंकुबेटर, दम तोड़ रहे रैफर नवजात

4 दिन से खराब एसएनसीयू का एसी

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चूरू.

राजकीय डेडराज भरतिया अस्पताल (डीबीएच) प्रशासन की लापरवाही का नतीजा मरीजों पर भारी पड़ रही है। कभी नेत्र चिकित्सालय तो कभी डीबीएच में मरीजों को अव्यवस्थाओं से दो-चार होना पड़ रहा है। लेकिन प्रशासन की जब तक खिंचाई नहीं होती तब तक उनकी आंख नहीं खुलती। मातृ एवं शिशु अस्पताल स्थित गहन शिशु उपचार इकाई (एसएनसीयू) में चार दिनों से एसी खराब है। लेकिन अभी तक सही करने की प्रक्रिया अस्पताल से बाहर नहीं निकली। वहीं यहां से रैफर कई नवजात रास्ते में आईसीयू सुविधा नहीं हो से दम तोड़ रहे हैं। लेकिन लाखों की लागत से आए एंकुबेटर का उपयोग नहीं लिया जा रहा है। जानकारी के मुताबिक अस्पताल में बिजली, पंखा, एसी ठीक करने के लिए टेक्नीशियन लगाया गया है। टेक्नीशियन के मुताबिक एसी की गैस खत्म हो गई है। इसके कारण कूलिंग नहीं हो रही है। इस संंबंध में अधीक्षक को पत्र भी लिख दिया गया लेकिन अभी तक सुधार नहीं हो सका। इसके कारण नवजातों को पंखे के सहारे रहना पड़ रहा है। उमस से लोगें के हाल बेहाल हैं लेकिन शिशुओं के प्रति प्रशासन गंभीर नहीं है।

प्रतिमाह रैफर होते हैं 25 नवजात
एसएनसीयू में प्रतिदिन आठ से दस नवजात भर्ती रहते हैं। वहीं महीने में कम से कम 25 से 30 नवजातों को बीकानेर व जयपुर रैफर करना पड़ता है। रैफर नवजातों को ले जाने के लिए सरकार की ओर से पिछले साल आईसीयू युक्त एंकुबेटर दिया गया था। लेकिन आज तक उसे काम में नहीं लिया गया। इसकी वजह से प्रतिमाह तीन से पांच शिशुओं की रास्तों में ही मौत हो जा रही है। यदि ऐसे गंभीर शिशुओं को आईसीयू युक्त एंकुबेटर में रैफर किया जाए तो इसमें से कुछ की जान बचाई जा सकती है। लेकिन प्रशासन की अनदेखी की वजह से ४.९१ लाख रुपए का उपकरण कमरे में धूल फांक रहा है।

एंकुबेटर की खाशियत
ट्रांसपोर्ट एंकुबेटर में आक्सीजन, रेडियंट फोटोथैरेपी आदि जैसी सुविधाएं हैं। इससे गहन शिशुओं को रास्ते में ऑक्सीजन, रेडिएंट व फोटोथैरेपी आदि की सुविधा मिलती रहेगी। इसका उद्देश्य उक्त सुविधा के अभाव में रास्ते में दम तोडऩे वाले नवजातों को बचाना था लेकिन यह उद्देश्य पूरा नहीं हो रहा।

नहीं कोई जिम्मेदार
बताया जा रहा है कि इसके लिए किसी की जिम्मेदारी तय नहीं की गई है। इसके लिए प्रशिक्षित स्टाफ की जरूरत है लेकिन अभी तक प्रशिक्षित स्टाफ की व्यवस्था भी डीबीएच प्रशासन की ओर से नहीं की गई। यह एक बड़ी लापरवाही है। डीबीएच प्रशासन अब भूल गया है कि अस्पताल में इस तरह का कोई उपकरण भी है।

एसी के खराब होने की सूचना
मिली है। एक या दो दिन के अंदर ही सही करवा दी जाएगी। रही बात एंकुबेटर की तो इसके बारे में संबंधित प्रभारी से बात कर शीघ्र ही सुविधा को शुरू कराया जाएगा।

डा. जेएन खत्री, अधीक्षक, राजकीय डेडराज भरतिया अस्पताल, चूरू