26 जनवरी 2026,

सोमवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

CHURU- NEWS- पराली फिर बन गई जान की दुश्मन, आसमान में गर्द और धुएं का गुबार

चूरू.साहवा. कस्बे सहित गांवों में इन दिनों दिनरात आसमान में गर्द व धुंए का गुबार ही नजर आने लगा है। मुख्य कारण बनी है परानी। कस्बे के शहीद भगत सिंह चौक, नोहर भादरा सड़क तिरोहे के पास नोहर व भादरा सड़क किनारे लगी दो दर्जन के करीब पराली की टालें व तारानगर सड़क किनारे चल रही दर्जन भर पीओपी की फैक्ट्री जो यहां की फिंजा में प्रदूषण का जहर घोल रही है।

3 min read
Google source verification

चूरू

image

Vijay

Nov 08, 2022

CHURU- NEWS- पराली फिर बन गई जान की दुश्मन, आसमान में गर्द और धुएं का गुबार

CHURU- NEWS- पराली फिर बन गई जान की दुश्मन, आसमान में गर्द और धुएं का गुबार

जिम्मेदारों की अनदेखी: पीओपी की फैक्ट्रियां फिंजा में घोल रही प्रदूषण का जहर, सांस लेना दूभर
रामकुमार सिहाग
चूरू.साहवा. कस्बे सहित गांवों में इन दिनों दिनरात आसमान में गर्द व धुंए का गुबार ही नजर आने लगा है। मुख्य कारण बनी है परानी। कस्बे के शहीद भगत सिंह चौक, नोहर भादरा सड़क तिरोहे के पास नोहर व भादरा सड़क किनारे लगी दो दर्जन के करीब पराली की टालें व तारानगर सड़क किनारे चल रही दर्जन भर पीओपी की फैक्ट्री जो यहां की फिंजा में प्रदूषण का जहर घोल रही है।
इन दिनों साहवा सहित आसपास के गांवों में फैल रहे प्रदूषण से लोग काफी परेशान हैं वहीं इन सड़कों से होकर गुजरने वाले वाहन चालक तथा उनमें सवार यात्रियों को भी खतरे का सामना करना पड़ रहा है। इस प्रदूषण का मुख्य कारण है, साहवा की पराली मण्डी में पराली खाली करते समय व कुट्टी मशीनों से पराली की कटाई करते समय उठने वाली गर्द (पराली के चिपकी चिकना मिट्टी का पाउडर) और कुट्टी मशीन के जुगाडी ईंजन से बिना किसी पैमाने के उठता उसका धुंआ एवं तारानगर सड़क किनारे लगी पीओपी फैक्ट्रीयों में जिप्सम ( चूना पाउडर) की पीसाई के लिए दिनरात चलने वाली चक्कियां से उठने वाली जिप्सम पाउडर की गर्द और उसे पकाने के लिए संचालित भट्टियों में जलाए जा रहे तरह तरह के ईंधन से उठने वाला काला व जहरीला धुआं जो दर्जनों गांवों की फिजां में अपने जहर घोल रहा है।
इन दिनों इन सब के कारण हवा में भारी प्रदूषण फैला रहता है तथा आसमान में दिनरात गर्द छाई रहती है जिससे लोगों के घरों में गर्द (धुएं युक्त मिट्टी की काली परतें) जमी रहती हैं, जो प्रदूषण के किसी भारी खतरे से खाली नहीं हैं। इसके अलावा तारानगर सड़क पर इन पीओपी फैक्ट्रीयों की साईड में प्रस्तावित राजकीय हायर विद्यालय के अलावा कई निजी स्कूल और कॉलेज चल रहे हैं वहीं नोहर भादरा सड़क तिराहे पर शहीद भगत सिंह चौक के आसपास बसे लोगों के घरों के अलावा रोड़वेज बस स्टेंड, 1 एग्रीकल्चर महा विद्यालय, 2 निजी हाई स्कूल, 3 निजी आईटीआई व एक दूध डेयरी (दुग्ध संग्रहण एवं अवशीतन केन्द्र) भी हैं। ऐसे में इन सब से जुड़े कार्मिकों, कुशल व अकुशल मजदूरों आदि के अलावा इसके आसपास रहने वाले लोग, पढऩे वाले बच्चे आदि हजारों लोग यहां पर अपनी सांसों के साथ बिना किसी एक्यूआर गणना वाले इस हाई पॉवर के वायु प्रदूषण की विषाक्तता के शिकार हो रहे हैं, जिस पर समय रहते आम जन जागृत तथा सबंधित विभाग व सरकार सचेत नहीं हुए तो इससे होने वाले दुष्प्रभाव कभी विस्फोटक साबित हो सकते हैं। साहवा निवासी विमला, सरोज, रोहित, रेशमी, विनोद आदि ने बताया कि वायु प्रदूषण को हम पिछले 15- 20 वर्षों से झेल रहे हैं, घरों में गर्द और धुंएं की काली परतें जमी रहती हैं। कोई सामान बाहर खुले में नहीं रख सकते हैं। यहां तक की रसोई की खिड़कियां भी खुली नहीं रख सकते। गर्द से बचने के लिए घर के खुले आंगन में भी जूते चप्पल पहन कर रहने को मजबूर हैं।

स्थायी समाधान के लिए प्रयास करेंगे
मण्डी में पराली लोडिंग व अनलोडिंग एवं पराली की कुतर कटाई के लिए चलाई जा रही कुट्टी मशीनों के डीजल इंजनों व पीओपी फैक्ट्रियों से निकलने वाले धुएं से फैलने वाले वायु प्रदूषण की समस्या पुरानी है, इसके कारण और समाधान दोनों पहलुओं को ध्यान में रख कर सबंधित विभाग, इससे जुड़े कारोबारियों, जनप्रतिनिधियों व प्रभावित लोगों को साथ लेकर स्थायी समाधान के लिए प्रयास करेंगे।
सुभाष कुमार, उपखण्ड अधिकारी, तारानगर

वायु प्रदूषण से सांस (दमा) व चर्म रोग से पूर्व में ग्रस्त रोगी तो परेशान हो ही रहे हैं, लगातार ज्यादा समय तक प्रदूषण रहने से दमा, व चर्म रोग होने की सम्भावनाएं बढ जाती हैं। इससे बचने के लिए वायु प्रदूषण की रोकथाम के उपायों से पहले लोगों को विशेष कर इन रोगों से पूर्व में ग्रस्त लोगों को मुंह पर मास्क लगाकर बाहर निकला व सुबह शाम घरों से बाहर नहीं निकलने की आदत बनानी चाहिए।
डॉ. रामेश्वर लाल भाकर, प्रभारी अधिकारी श्रीमती मोहनीदेवी राजकीय सीएचसी साहवा

वायु प्रदूषण की यह गम्भीर समस्या हमारे यहां तो जब से ये पराली की टालें लगी हैं तब से आज तक 24 घन्टों व 365 दिन बनी रहती है, इसे लेकर प्रभावित लोगों ने अनेक बार मुद्दा उठाया और आन्दोलन भी हुए मगर आज तक हंमे राहत नहीं मिल पाई ऐसे में अगर इससे बचाव के लिए दिल्ली सरकार की तर्ज पर छुट्टी करें तो हंमे तो 365 दिन छुट्टी रख कर स्कूल बंद करने पड़ेंगे।
दयाराम भाम्भू, निदेशक एपेक्स हाई स्कूल साहवा