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राजस्थान के इस जिले में संचालित प्रगति लैब बनेगी कम्प्यूटेशनल थिंकिंग सीखने का सशक्त माध्यम

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप जिला कलक्टर की पहल पर ‘प्रगति लैब’ कार्यक्रम के माध्यम से नौनिहाल को सोशल इमोशनल लर्निंग, एआई, एंटरप्रेन्योरशिप एवं कम्प्यूटेशनल थिंकिंग जैसी 21 वीं सदी की आवश्यक दक्षताओं मे दक्ष करने का काम किया जा रहा हैं।

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चूरू. शिक्षा विभाग, खेल शिक्षा, तकनीक सहित विविध क्षेत्रों में कार्य करनेवाली संस्था एफआई का सहयोग और जिला प्रशासन की पहल का जब संगम होता है तो नवाचारों का उदय होता है। ऐसा ही हुआ चूरू जिले में संचालित ‘प्रगति लैब’ कार्यक्रम (Pragati Lab Programme) शिक्षा के क्षेत्र में जो आज सकारात्मक बदलाव का सशक्त माध्यम बन रहा है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप जिला कलक्टर की पहल पर ‘प्रगति लैब’ कार्यक्रम के माध्यम से नौनिहाल को सोशल इमोशनल लर्निंग, एआई, एंटरप्रेन्योरशिप एवं कम्प्यूटेशनल थिंकिंग (Computation Thinking) जैसी 21 वीं सदी की आवश्यक दक्षताओं मे दक्ष करने का काम किया जा रहा हैं।

11 स्कूलों में संचालित हैं प्रगति लैब
जिले में स्कूल शिक्षा को सुदृढ़ करने की दिशा में जिले की राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय राणासर, कुनसीसर, साडसर, रिड़खला, गाजसर, देपालसर, ढाढ़रिया बणीरोतान, आसलखेड़ी, महात्मा गांधी स्कूल (Mahatma Gandhi School) खासोली व केजीबीवि चूरू आदि 11 स्कूलों में संचालित प्रगति लैब में इन विद्यालयों के कक्षा 6 से 8 वीं तक के करीब 700 से अधिक विद्यार्थियों को पारंपरिक रटने की पद्धति से हटकर गतिविधि-आधारित एवं प्रोजेक्ट-आधारित शिक्षण पद्धति के माध्यम से सीखने का अवसर मिल रहा है। कम्प्यूटेशनल थिंकिंग के अंतर्गत बच्चों को समस्या समाधान की तार्किक प्रक्रिया, पैटर्न पहचान, एल्गोरिदमिक सोच, डिकम्पोजिशन और क्रमबद्ध विश्लेषण जैसी क्षमताएं विकसित कराई जा रही हैं। इससे विद्यार्थियों में कोडिंग, रोबोटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artifical Intelligence) और डिजिटल तकनीक के प्रति प्रारंभिक समझ विकसित हो रही है। सोशल इमोशनल लर्निंग के माध्यम से विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, टीमवर्क, नेतृत्व क्षमता, भावनात्मक संतुलन और सकारात्मक व्यवहार को बढ़ावा दिया जा रहा है, जो उनके समग्र व्यक्तित्व विकास में सहायक है।

ढाढ़रिया बणीरोतान के बच्चों से संवाद
जिले के राउमावि ढ़ाढरिया बणीरोतान प्रगति लैब में कम्प्यूटर पर सीख रहे मनोज, आनंद, पिंकी, सुदरपाल सहित अन्य बच्चों ने संवाद में बताया कि प्रगति लैब में सीखना रोचक और व्यावहारिक है। गतिविधियों, खेल-आधारित शिक्षण और समूह कार्य के माध्यम से वे जटिल विषयों को भी आसानी से समझ पा रहे हैं। विद्यार्थियों का कहना था कि उन्हें लैब में कम्प्यूटर को चालू करने, इंटरनेट का उपयोग करने, गाने सुनने, चित्र बनाने सहित अन्य तकनीकी जानकारी व्यवहारिक ढंग से समझाई जाती हैं। इन बच्चों को लैब में सभी प्रशिक्षण निर्धारित पाठ्यक्रम के अनुसार दिए जाते हैं।

‘प्रगति लैब’ से जुड़ेंगे जिले के स्कूल
जिला कलक्टर अभिषेक सुराणा का कहना है कि इस विधा में पढ़ना बच्चों को अच्छा लगता है। इसलिए जिला प्रशासन की ओर से प्रगति लैब जैसे नवाचार शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार लाने और ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों को भी तकनीकी रूप से सशक्त बनाने के प्रयास किया जा रहा हैं। अभी जिले के 11 स्कूलों में इसकी शुरूआत हुई है, जिले के अन्य स्कूलों को भी ‘प्रगति लैब’ से जोड़ा जाना प्रस्तावित है।