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राजस्थान के इस गांव में एक भी मुस्लिम नहीं, हिंदू करते हैं दरगाह में इबादत

Story of Ghantel Village of Churu : चूरू जिला मुख्यालय से छह किमी दूर स्थित गांव घंटेल एक ऐसी इबारत लिख रहा है, जिसका हर कोई कायल है। करीब छह हजार की आबादी वाले इस गांव में एक भी मुस्लिम नहीं है, लेकिन गंगा-जमुनी तहजीब को हिन्दू ( Hindu Prayers in Dargah ) पूरी शिद्दत के साथ सहेजे हुए हैं।

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चूरू

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Naveen Parmuwal

Nov 11, 2019

राजस्थान के इस गांव में एक भी मुस्लिम नहीं, हिंदू करते हैं दरगाह में इबादत

राजस्थान के इस गांव में एक भी मुस्लिम नहीं, हिंदू करते हैं दरगाह में इबादत

चूरू.
Story of Ghantel Village of Churu : चूरू जिला मुख्यालय से छह किमी दूर स्थित गांव घंटेल एक ऐसी इबारत लिख रहा है, जिसका हर कोई कायल है। करीब छह हजार की आबादी वाले इस गांव में एक भी मुस्लिम नहीं है, लेकिन गंगा-जमुनी तहजीब को हिन्दू ( Hindu Prayers in Dargah ) पूरी शिद्दत के साथ सहेजे हुए हैं। इस गांव के लोगों में पीर के प्रति मुस्लिम परिवारों के समान ही आस्था है। इस गांव की पीर दरगाह पर हर शुक्रवार को छोटा मेला लगता है जहां पर हिंदू व दूसरे गांव के मुस्लिम आकर मन्नतें मांगते हैं। दरगाह को संभालने वाले गांव के संतलाल महाब्राह्मण ने बताया कि 70 फीट से अधिक ऊंचे टीले पर दरगाह है। लोगों की मान्यता है कि आज भी किसी घर में आग लगती है तो पीर की कृपा दृष्टि से आग कभी दूसरे घर में नहीं फैलती है। गांव में जिस साल बारिश नहीं होती है तो गांव के लोग दरगाह के पास हाथ से मिट्टी खोदते हैं। तो कुछ ही दिनों में बारिश हो जाती है।


जोधपुर से आए...
गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि एक हजार से अधिक वर्ष पहले हुए किसी युद्ध के दौरान पांच योद्धा लडाई के लिए जोधपुर से रवाना हुए। यहां आकर एक योद्धा युद्ध में काम आ गए। जिनकी ये मजार दरगाह के रूप में आज यहां स्थापित है। दूसरे योद्धा की मजार झुंझुनूं के नरहड़ में है। घंटेल के पीर नरहड़ के पीर के बड़े भाई थे।


घटने का नाम है घंटेल
गांव के नामकरण के बारे में लोगों की मान्यता है कि करीब 1700 वर्ष पहले यहां मोयल चौहान आकर बसे थे। उस समय यहां सात बास (मोहल्ले) होते थे। किसी प्राकृतिक आपदा के कारण तीन मोहल्ले खत्म हो गए और चार बास रह गए। जो आज भी हैं। बास घटने पर गांव का नाम घंटेल पड़ा।

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