1 फ़रवरी 2026,

रविवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

चूरू

‘स्वामी गोपालदास कर्मशील संत थे

सर्वहितकारिणी सभा चूरू के संस्थापक व स्वतंत्रता सेनानी स्वामी गोपालदास की पुण्यतिथि स्वामी गोपालदास चौक पर मनाई गई। इस मौके पर स्मृति सभा एवं स्वामी गोपालदास पुरस्कार समारोह का आयोजन किया गया। सर्वहितकारिणी पुत्री पाठशाला की छात्राओं ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। भंवर सिंह सामौर ने स्वागत भाषण दिया।

Google source verification

चूरू.

सर्वहितकारिणी सभा चूरू के संस्थापक व स्वतंत्रता सेनानी स्वामी गोपालदास की पुण्यतिथि स्वामी गोपालदास चौक पर मनाई गई। इस मौके पर स्मृति सभा एवं स्वामी गोपालदास पुरस्कार समारोह का आयोजन किया गया। सर्वहितकारिणी पुत्री पाठशाला की छात्राओं ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। भंवर सिंह सामौर ने स्वागत भाषण दिया। मुख्य वक्ता बीकानेर विश्वविद्यालय के पूर्व वीसी डॉक्टर गंगाराम जाखड़ ने कहा कि स्वामी गोपालदास कर्मशील संत थे, उन्होंने जिन परिस्थितियों में महिला, दलित शिक्षा के लिए कार्य किया वो अकल्पनीय है। स्वामी ने पंजाब से आने वाले गेहूं पर लगने वाले जकात का विरोध किया था। जिसके परिणामस्वरूप उन्हें बीकानेर षडय़ंत्र केस में 4 वर्ष कि सजा दी गई थी। भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता ओम सारस्वत ने ये कार्यक्रम निरंतर जारी रखने का आह्वान किया। रामगोपाल बहड़ ने स्वामी गोपालदास के कृतित्व एवं व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला। स्मृति सभा में पहली बार स्वामी गोपालदास पुरस्कार इतिहासकार गोविन्द अग्रवाल को मरणोपरांत दिया गया। श्यामसुंदर शर्मा ने गोविन्द अग्रवाल के योगदान के बारे में जानकारी दी। इस अवसर पर भंवरलाल राकेश कुमार कस्वा के सौजन्य से गोविन्द अग्रवाल की पुत्री कांता अग्रवाल को गोविन्द अग्रवाल के पुरस्कार स्वरूप रूपये 11 हजार रूपए, शॉल, प्रतीक चिह्न तथा श्रीफल प्रदान किया। नोहर से आए गोविन्द चौधरी ने स्वामी गोपालदास कार्यों को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल करने की मांग राज्य सरकार से की। इसके लिए कार्य योजना बनाने का आह्वान किया।

 

इस अवसर पर भंवर लाल कस्वां, माधव शर्मा, सुनीता कपूरिया, मोहन अर्जुन, देवेन्द्र जोशी ने भी विचार व्यक्त किए। एचआर इसरान ने आभार जताया। दलीप सरावग ने आयोजकीय भूमिका निभाई। इस अवसर पर पंकज गुप्ता, भागीरथ शर्मा, रामनाथ कस्वां, दुलाराम सहारण, विश्वनाथ चौधरी, ओंकार डूडी, सुरेन्द्र बाबल, रणजीत कड़वासरा, शर्र्मिला, राजेंद्र कल्ला, विकास मील, राधेश्याम कस्वां, पुत्री पाठशाला के प्रधानाध्यापक भंवरलाल जांगिड़, कपिल कालेर, नवनीत कस्वां, पवन खेमका, शिव कुमार सैनी, अमर सिंह लाम्बा,सत्यवीर बेनीवाल,शाहरुख़ खान, विनोद ऐचरा, राकेश बेनीवाल, अंजू नेहरा, अनिल बालान, राजेश तंवर आदि मौजूद थे। हनुमान कोठारी ने कोलकाता से संदेश भेजकर स्वामी के कार्यों के बारे में बताया। संचालन रवि दाधीच ने किया।