
दुर्लभ जीव-जंतुओं का गढ़ है सादुलपुर का लीलकी बीहड़,दुर्लभ जीव-जंतुओं का गढ़ है सादुलपुर का लीलकी बीहड़
भंवरसिंह राजपूत
सादुलपुर. तहसील मुख्यालय से 25 किमी दूर ऐतिहासिक लीलकी बीड़ अनेक पशु, पक्षियों की शरणगाह है लेकिन अभयारण्य का दर्जा नहीं मिल पाने के कारण ये विकसित नहीं हो रहा है। ये ऐसा स्थान है जहां दुर्लभ जातियों के पक्षियों को देखा जा सकता है। इसको अभयारण्य बनाने की लंबे समय से मांग की जाती रही हैलेकिन सरकारों की ओर से ध्यान नहीं दिया जा रहा है। ये बीहड़ एक हजार 94 हैक्टेयर क्षेत्र में फैला हुआ है। यहां पर बहुमूल्य जड़ी-बूटियां भी उपलब्ध है। इसके अलावा यहां विभिन्न प्रकार के पेड़-पौधे बीड़ की सुंदरता भी बढ़ा रहे हैं। लेकिन अनदेखी के चलते ये बीड़ अपनी सुंदरता को खोता जा रहा है। पेड़ों की कटाई रोकने एवं वन्य जीव जंतुओं को सुरक्षित रखने के लिए 18 किमी लंबी दीवार बना दी है। इस बीड़ में हाथी टीले के नाम पर ऊंचा टीला है। जिस पर खड़े होकर 15 किमी तक की दूरी के गांवों को आसानी से देखा जा सकता है।
अतिक्रमण से करवाया था मुक्त
सन् 1994 से पहले लोगों ने आठ सौ हैक्टेयर से अधिक क्षेत्र में अवैध अतिक्रमण कर खेती करनी शुरू कर दी थी। बाद में लोगों के विरोध के चलते वन विभाग ने अतिक्रमियों के खिलाफ न्यायालय में लड़ाई लड़ी तथा प्रशासन की मदद से बीड़ को अतिक्रमण से मुक्त करवाया था।
ये हैं जीव-जंतु
लीलकी बीड़ में वर्तमान में सांडा, पाटागोह, कोबरा, गिरगिट, लोमड़ी, जंगली बिल्ली, चिंकारा हिरण, खरगोश, लिजार्ड, गिलहरी, कछुआ सहित पक्षियो में किंगफिशर, होर्नबिल, विभिन्न प्रकार की चिडिय़ां, बाज, तीतर, काला तीतर, बया, टिटहरी आदि सहित नील गाय भी बीड़ में विचरण करते हैं।
एक लाख तैयार हैं पौधे
विभागानुसार लीलकी बीड़ में बनाई गई नर्सरी में विभिन्न प्रकार के एक लाख लगभग पौधे तैयार हैं तथा क्षेत्र में पौधरोपण अभियान के साथ-साथ बीड़ को हरा-भरा बनाने के लिए विभाग की ओर से कार्रवाई की जा रही है।
इनका कहना है
&लीलकी बीड़ के रखरखाव एवं अन्य आवश्यक कार्रवाई के लिए विभाग प्रयासरत है तथा नर्सरी तैयार कर बीड़ को हरा-भरा बनाने की योजना है। इसके अलावा अभयारण्य बनाने के पहले भी तथा वर्तमान में भी संबंधित विभाग के अधिकारियों को अवगत करवाकर उचित कार्रवाई करेंगे।
संजीव कुमार, क्षेत्रीय वन अधिकारी, सादुलपुर।
Published on:
31 Jan 2020 10:35 am
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