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Afro-Asia Cup: भारत-पाक के खिलाड़ियों को मिलाकर बनेगी टीम और अफ्रीका से होगा मुकाबला!

Afro Asia Cup: साल 2007 में आखिरी बार एफ्रो-एशिया कप का आयोजन हुआ था, जहां एशिया 11 ने 5 मैचों की सीरीज को 3-0 से अपने नाम कर लिया था।

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Afro Asia Cup 2024

Afro Asia Cup Likely to Play Again: भारत और पाकिस्तान के बीच पिछले एक दशक से भी ज्यादा समय से द्वीपक्षीय सीरीज नहीं खेली जा रही है। दोनों टीमें सिर्फ आईसीसी टूर्नामेंट में ही एक दूसरे का मुकाबला करती नजर आती हैं या एशिया कप में भिड़ती हैं। हालांकि अब जय शाह के आईसीसी के नए चेयरमैन बनने की खबर से 17 साल पहले खेले गए एफ्रो एशिया कप के दोबारा खेले जाने की उम्मीद जग गई है। इस सीरीज के लिए फैंस बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। जब आखिरी बार ये सीरीज हुई थी तो भारत और पाकिस्तान के बीच रिश्ते ठीक थे लेकिन अब हालात बदल गए हैं। ऐसे में फैंस इस सीरीज के लिए इसलिए भी बेकरार हैं कि जो दो देशों के खिलाड़ी द्वीपक्षीय सीरीज नहीं खेलते वह एक साथ एक टीम में एक कप्तान के अंडर खेलते नजर आएंगे।

हालांकि ऐसा कर पाना जय शाह के लिए भी आसान नहीं हैं। लेकिन अगर ऐसा हुआ तो शायद इसी के जरिए दोनों देशों के रिश्तें भी ठीक होने की संभावना बढ़ जाएगी। अगर ऐसा हुआ और एफ्रो एशिया कप वापस लौटा तो एक बार फिर भारत और पाकिस्तान के खिलाड़ी एक साथ एक ही टीम में खेलते हुए नजर आएंगे। दोनों देशों के खिलाड़ी टीममेट्स बनेंगे। दोनों देशों के खिलाड़ियों का कप्तान भी एक ही होगा। सबसे बड़ी बात ये है कि एफ्रो-एशिया कप के जरिए भारत के विराट कोहली और पाकिस्तान के बाबर आजम एक ही कप्तान के नेतृत्व में एक ही टीम में खेलते हुए नजर आ सकते हैं।

2007 में आखिरी बार खेली गई थी सीरीज

दरअसल अफ्रीकन क्रिकेट एसोसिएशन के चेयरमैन समोद दामोदर ने इस सीरीज के दोबारा खेले जाने को लेकर चर्चा शुरू की है। आखिरी बार यह टूर्नामेंट 2007 में खेला गया था, जिसमें एशिया इलेवन और अफ्रीका इलेवन की भिड़ंत हुई थी। अफ्रीका 11 की टीम जिम्बाब्वे, केन्या और साउथ अफ्रीका के खिलाड़ियों में से चुनी जाती है तो एशिया 11 की टीम में बांग्लादेश, श्रीलंका, पाकिस्तान और भारत के खिलाड़ी शामिल होंगे। दामोदर ने बताया, "निजी तौर पर मुझे बहुत खराब लगा कि यह नहीं हुआ। एसीए के जरिए से जरूरी रफ्तार नहीं मिली, लेकिन इस पर फिर से विचार किया जा रहा है। हमारे मेंबर इस पर पछता रहे हैं। इसे अफ्रीका के जरिए आगे बढ़ाने की जरूरत थी।"

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