
बेटे से साथ हुई इस एक घटना ने आस्ट्रेलियन स्पीड स्टार ब्रेट ली के जीवन को बदल दिया
नई दिल्ली। आस्ट्रेलिया क्रिकेट टीम के स्टार पूर्व तेज गेंदबाज ब्रेट ली लंबे समय से भारत में है। इंडियन प्रीमियर लीग के दौरान ब्रेट ली कमेंट्री करते दिख रहे थे। साथ ही ब्रेट ली पर कई शॉट वीडियो भी बनाए गए थे। जिन्हें प्रशंसकों ने खूब पसंद भी किया था। अब जब आईपीएल का शोर थम चुका है तो ब्रेट ली अपने पुराने कामों की ओर लौट चुके है। ब्रेट ली ने मंगलवार का दिन अमृतसर के गोल्डन टेंपल और अस्पताल में बिताया। स्वर्ण मंदिर की एक तस्वीर ब्रेट ली ने अपने इंस्टाग्राम से शेयर भी किया। मंदिर में घुमने के साथ-साथ ब्रेट ली अमृतसर के श्री गुरु रामदास यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसिस भी पहुंचे। यहां ब्रेट ली ने सुनने की क्षमता खो चुके बच्चों के बीच अपना वक्त बिताया।
बुधवार को गंगाराम हॉस्पिटल पहुंचे ब्रेट ली-
अमृतसर से वापस आने के बाद ब्रेट ली बुधवार को राजधानी दिल्ली के सर गंगाराम हॉस्पिटल पहुंचे। यहां भी ब्रेट ली ने सुनने की क्षमता में कमी के शिकार हो चुके बच्चों के साथ अपना वक्त बिताया। इससे पहले भी कई बार ब्रेट ली भारत के अलग-अलग शहरों में ऐसे बच्चों के साथ वक्त बीता चुके है। ऐसे में एक सवाल सहज ही मन में आता है कि आखिर ऐसी क्या वजह है कि ब्रेट ली सही तरीके से नहीं सुन पाने वाले बच्चों के साथ अपना वक्त बिताते है।
वजह है बेहद निजी-
सुनने की क्षमता खो चुके या इस समस्या के पीड़ित बच्चों के लिए ब्रेट ली के दिल में खास प्यार है। दरअसल पांच साल की उम्र में ली के बेटे ने गिर जाने के कारण अपनी सुनने की क्षमता खो दी थी। हालांकि, खुशनसीबी यह थी की उनके बेटे की परेशानी बिना सर्जरी ठीक हो गई, लेकिन इसने ली को सोचने को मजबूर कर दिया और जब उन्हें हियरिंग मशीन बनाने वाली कंपनी कोकले के ब्रैंड एम्बेसडर बनने का मौका मिला तो उन्होंने तुरंत हामी भर दी।
ली ने खुद दी ये जानकारी-
ली ने इस मामले पर खुद कहा कि मेरा बेटा पांच साल की उम्र में गिर गया था। उसने दाएं कान से सुनने की क्षमता खो दी थी। जब उसका टेस्ट किया गया तो पता चला की उसकी सुनने की क्षमता सामान्य स्तर से काफी नीचे है। मैं उसे लेकर काफी चिंतित था। मैं परेशान था कि इस समस्या के साथ वो अपनी पढ़ाई कैसे करेगाए लेकिन खुशनसीबी से बिना सर्जरी के उसकी सुनने की झमता अपने आप वापस आ गई।"
दो सालों में आए परिणाम से खुश है ली-
उन्होंने कहा कि इस घटना ने मुझे सुनने की क्षमता खोने जैसी गंभीर बिमारी के बारे में सोचने को मजबूर कर दिया। मेरा काम इसके प्रति जागरूकता फैलाना है, लोगों को सूचित करना है। पिछले दो वर्षों में जो परिणाम निकल कर आए हैं उनसे मैं काफी खुश हूं। मुझे इससे खुशी मिलती है। यह ऐसी जिम्मेदारी है जिसे मैं काफी गंभीरता से लेता हूं।
Published on:
30 May 2018 05:59 pm
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