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दिल्ली एंड जिला क्रिकेट संघ सवालों के घेरे में, सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अवहेलना का आरोप

भारद्वाज ने पत्र में लिखा है कि डीडीसीए ने गलत तरीकों से सीओए से मान्यता प्राप्त की है
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Manoj Sharma Sports

Sep 17, 2019

feroz shah kotla

नई दिल्ली। दिल्ली एवं जिला क्रिकेट संघ ( डीडीसीए ) के निदेशक संजय भारद्वाज ने बीसीसीआई के चुनाव अधिकारी एन. गोपालस्वामी को एक शिकायती पत्र लिखा है।

भारद्वाज ने पत्र में लिखा है कि डीडीसीए ने गलत तरीकों से प्रशासकों की समिति ( सीओए ) से मान्यता प्राप्त की है। इसके अलावा उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि डीडीसीए, सर्वोच्च अदालत के नौ अगस्त 2018 के आदेश के फैसले को पालन नहीं कर रहा है।

भारद्वाज ने गोपालस्वामी को जो मेल लिखा है उसमें उन्होंने विस्तारपूर्वक बताया है कि डीडीसीए किन-किन जगहों पर सर्वोच्च अदालत के आदेश का उल्लंघन कर रही है।

पत्र के अनुसार डीडीसीए के पुराने संविधान में दिल्ली उच्च न्यायालय के 30 जनवरी, 2017 के आदेश के हिसाब से सुधार किए गए थे और इसे डीडीसीए की अंतिम एजीएम में मंजूरी भी मिली थी। बाद में बीसीसीआई को सर्वोच्च अदालत ने नौ अगस्त 2018 को अपना संविधान बदलने का आदेश दिया।

इसके अलावा शीर्ष अदालत ने यह भी कहा था कि बीसीसीआई अपने सहयोगी संघों से इसी प्रक्रिया के मुताबिक अपने-अपने संविधान 30 दिन के अंदर मंजूर करे। डीडीसीए ने 16 सदस्यी शीर्ष परिषद के सामने अपने संविधान में सुधार किए और उसे मंजूरी दी, यह सब 4300 सदस्यों की जनरल बॉडी के सामने नहीं हुआ, इसलिए इसे मंजूरी मिलना गैरकानूनी है।

पत्र के अनुसार, संविधान सर्वोच्च अदालत के मुताबिक भी नहीं था। डीडीसीए का कोषाध्यक्ष मौजूदा विधायक है, लेकिन सर्वोच्च अदालत ने जो संविधान मंजूर किया था उसमें साफ कहा गया था कि वो शख्स, जो मंत्री, सरकारी कर्मचारी, या किसी सरकारी कार्यालय में पदस्थ हो वो संघ में शामिल नहीं हो सकता।

पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि शीर्ष परिषद में नौ सदस्य होने चाहिए जबकि डीडीसीए की शीर्ष परिषद में 16 सदस्य हैं। इन 16 में से चार सरकार द्वारा नामित हैं जो लोढ़ा समिति की सिफारिशों के खिलाफ है।

पत्र के अनुसार, सर्वोच्च अदालत के आदेश के मुताबिक नौ सदस्यों की शीर्ष परिषद में एक पुरुष क्रिकेटर और एक महिला क्रिकेटर का होना अनिवार्य है जो राज्य संघ की खिलाड़ियों की एसोसिएशन से आते हैं तो जबकि डीडीसीए की खिलाड़ियों की कोई एसोसिएशन ही नहीं है।

पत्र के अंत में भारद्वाज ने कहा है कि डीडीसीए को किस आधार पर मान्यता प्राप्त संघ का दर्जा मिला है जबकि वह सर्वोच्च अदालत के कई आदेशों का अनुसरन नहीं कर रही है। भारद्वाज ने गोपालस्वामी से इस मामले को गंभीरता से देखने और सख्त कदम उठाने को कहा है।

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