
बंगाल प्रोविंस से अलग होने के करीब 88 साल बाद नवंबर 2000 में बिहार का विभाजन हुआ और झारखंड नया राज्य बना। विभाजन के साथ ही बिहार में क्रिकेट खत्म हो गया और यहां के खिलाड़ियों की बची-खुची उम्मीद भी खत्म हो गई। विभाजन के बाद भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) की मान्यता झारखंड के हिस्से में चली गई और यहां क्रिकेट की हालत और भी खस्ता होती चली गई। झारखंड बनाने के बाद यहां से कोई भी क्रिकेटर नहीं निकला। बिहार में टैलेंट बहुत है। लेकिन यहां के खिलाड़ी या तो झारखंड या पश्चिम बंगाल जाकर क्रिकेट खेलते हैं।
ऐसे में करीब दो दशक के बाद उम्मीद की एक किरण जागी और बिहार के पास क्रिकेट की दुनिया में अपना गौरव हासिल करने का एक बड़ा मौका आया। लेकिन न तो प्रसशन और न ही उनकी टीम इस मौके का फायदा उठा सकी। बिहार की टीम ने 18 साल बाद रणजी ट्रॉफी में वापसी की। पटना के मोइनुल हक स्टेडियम में मुंबई और बिहार के बीच रणजी मुक़ाबला खेला गया। लेकिन यह मुक़ाबला खेल के लिए नहीं बल्कि अन्य हरकतों के चलते सुर्खियों में रहा।
इतने सालों बाद राज्य में क्रिकेट वापस आ रहा था। यह खुशी का मौका था। लेकिन बिहार क्रिकेट एसोसिएशन (BCA) ने मोइनुल हक स्टेडियम को रेनोवेट कराने की जरूरत ही नहीं समझी। स्टेडियम की जर्जर हालत ने बिहार की इंटरनेशनल बेइज्जती कराई। कभी विश्व कप मैच की मेजबानी कर चुके इस स्टेडियम की बिल्डिंग जर्जर है। स्टैंड पर लंबी लंबी घास ऊगी हुई थी। यह तो लोगों का जुनून ही था जो जंगल में खड़े होकर क्रिकेट का आनंद ले रहे थे। स्टेडियम में स्कोरबोर्ड तक नहीं था और गैलरी में कपड़े सूख रहे थे। चारों तरफ गंदगी का अंबार लगा हुआ था।
ग्राउंड की हालत भी इतनी खराब थी कि पूर्व भारतीय कप्तान और इस मैच में आकर्षण का केन्द्र अजिंक्य रहाणे मैच खेलने ही नहीं आए। रिपोर्ट्स के मुताबिक मुंबई का कप्तान होने के बावजूद रहाणे खराब पिच और घटिया आउटफील्ड की वजह से नहीं खेले। अब सवाल यह उठता है कि बिहार की सत्ता पर काबिज नीतीश कुमार और खुद एक क्रिकेट खिलाड़ी रह चुके डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव को क्या मोइनुल हक़ स्टेडियम की दुर्दशा कभी नहीं दिखी।
स्टेडियम के अलावा बिहार क्रिकेट एसोसिएशन में मचे बवाल की वजह से भी यह मुक़ाबला सुर्खियों में रहा। रणजी ट्रॉफी के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ जब मुंबई के खिलाफ मैच खेलने के लिए बिहार की दो टीमें मैदान में पहुंच गईं। जिसकी वजह से बिहार क्रिकेट को पूरे देश के सामने हंसी का पात्र बनाना पड़ा। बिहार क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश तिवारी ने रणजी ट्रॉफी के लिए आधिकारिक टीम का ऐलान किया था। लेकिन दूसरी तरफ बर्खास्त सचिव अमित कुमार ने भी एक अलग टीम की सूची जारी कर दी। ऐसे में दोनों टीम मैदान पहुंच गई और कैन सी टीम मुंबई का सामना करेगी इसको लेकर दोनों खेमों के बीच विवाद हो गया।
सचिव गुट की टीम खेलने पहुंची तो उन्हें सख्ती के साथ ग्राउंड में प्रवेश से रोक दिया गया। मौजूद पुलिस बल ने उन्हें सख्ती के साथ बस में बैठकर स्टेडियम से बाहर कर दिया। इसके कुछ देर के बाद अज्ञात लोगों ने बीसीए के ओएसडी पर जानलेवा हमला कर दिया। उनके साथ मारपीट की गई। पत्थर से उनके सिर पर प्रहार कर जख्मी कर दिया गया।
इतना ही नहीं रणजी मैच के दौरान कुछ दर्शक खिलाड़ियों के साथ गाली गलौज करते भी नज़र आए। सोशल मीडिया पर कई ऐसे विडियो देखे गए जहां दर्शक बाउंड्री पर खड़े मुंबई के खिलाड़ियों पर अभद्र भाषा का प्रयोग कर रहे हैं।
Published on:
08 Jan 2024 05:18 pm
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