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बॉर्डर एरिया में कोई भी परियोजना शुरू करने के लिए अब लेनी होगी सेना की इजाजत

सुरक्षा कारणों से लिया गया है निर्णय

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पश्चिमी राजस्थान के सीमावर्ती जिलों में अब चुनिंदा विभागों की परियोजनाएं लागू करने के लिए रक्षा मंत्रालय या फिर सेना के कमांड मुख्यालय से अनुमति लेनी होगी। इसके बिना काम शुरू नहीं करवाए जा सकेंगे।

सरहदी इलाकों में पाकिस्तान से लगती सीमा पर सुरक्षा व्यवस्थाओं के मद्देनजर यह निर्णय लिया गया है। सम्बन्धित विभाग को कोई काम शुरू करने के लिए अब पहले राज्य सरकार या सम्बन्धित विभाग के मुख्यालय को प्रस्ताव भेजे जाएंगे। वहां से यह प्रस्ताव रक्षा मंत्रालय या सेना के कमांड मुख्यालय जाएगा और इसे मंजूरी देने के लिए साठ दिन का समय निर्धारित किया गया है। रक्षा मंत्रालय ने जल संसाधन, ट्रांसपोर्ट, रेलवे, खनिज, ऊर्जा, पेट्रोलियम व गैस सहित अन्य एक दर्जन विभागों को इस बारे में पत्र लिखकर इससे अवगत करवाया है।

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जल परियोजनाओं का काम

जोधपुर से जैसलमेर के बीच राज्य सरकार की ओर से एक नई समानान्तर कैनाल शुरू करने पर विचार चल रहा है। इसके लिए जलदाय विभाग ने करीब 2450 करोड़ का प्रस्ताव तैयार किया है और इसके अलावा 1.50 करोड़ रुपए डीपीआर बनाने में खर्च किए जाएंगे। इस योजना के अलावा अन्य योजनाओं के लिए भी अब सेना या रक्षा मंत्रालय की अनुमति जरूरी होगी। इससे यह काम और लम्बा ङ्क्षखच सकता है।

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सीमावर्ती जिलों में बड़े वाटर टैंक बनाने सहित अन्य पेयजल या सिंचाई परियोजनाओं के लिए हम मुख्यालय को प्रस्ताव भेजेंगे। वहां से सेना या रक्षा मंत्रालय में पत्रावली जाएगी। मंजूरी के बाद ही आगे की कार्यवाही होगी। - प्रेमसुख शर्मा, मुख्य अभियंता, जलदाय विभाग

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