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BCCI की ‘इंसेंटिव स्कीम’ पर कोच राहुल द्रविड़ की दो टूक, कहा – यह इनाम है प्रोत्साहन नहीं

द्रविड़ का मनना है कि टेस्ट क्रिकेट खेलने के लिए प्रोत्साहन के तौर पर पैसे नहीं दिए जाने चाहिए। क्योंकि टेस्ट क्रिकेट बाकी फॉर्मेट के मुक़ाबले कठिन है। द्रविड़ ने कहा कि इस स्कीम को भारत के लिए टेस्ट क्रिकेट खेलने के प्रोत्साहन के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

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Rahul dravid on BCCI Incentive scheme: भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने टेस्ट क्रिकेट को बचाने के लिए एक और कदम उठाया है। ज्यादा से ज्यादा युवा खिलाड़ी टी20 और इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) की जगह टेस्ट क्रिकेट खेलें इसके लिए बोर्ड एक इंसेंटिव स्कीम लेकर आया है। जिसके तहत टेस्ट क्रिकेट को प्राथमिकता देने वाले खिलाड़ियों को मैच फीस के रूप में ज्यादा पैसा मिलेगा।

बीसीसीआई एक सचिव जय शाह ने धर्मशाला टेस्ट में मिली ऐतिहासिक जीत के बाद इसकी घोषणा की है। लेकिन टीम के मुख्य कोच और महान बल्लेबाज राहुल द्रविड़ बीसीसीआई की इस स्कीम से 100 प्रतिशत खुश नहीं हैं। द्रविड़ का मनना है कि टेस्ट क्रिकेट खेलने के लिए प्रोत्साहन के तौर पर पैसे नहीं दिए जाने चाहिए। क्योंकि टेस्ट क्रिकेट बाकी फॉर्मेट के मुक़ाबले कठिन है। द्रविड़ ने कहा कि इस स्कीम को भारत के लिए टेस्ट क्रिकेट खेलने के प्रोत्साहन के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, ना की ज्यादा पैसा मिलने वाली स्कीम के तौर पर।

बोर्ड की स्कीम पर द्रविड़ ने अपनी बात रखते हुए कहा, 'मुझे उम्मीद है कि टेस्ट क्रिकेट खेलने के लिए प्रोत्साहन के तौर पर पैसे नहीं दिए जाएंगे। यह इस बात को पहचानने में एक कदम है कि टेस्ट क्रिकेट कितना कठिन प्रारूप है। टेस्ट क्रिकेट खेलना इतना आसान नहीं है। क्या हम 100 टी20 मैच खेलने के बाद वैसा ही जश्न मनाते हैं, जैसा हम 100 टेस्ट मैच खेलने के बाद मनाते हैं? यह प्रोत्साहन भत्ता नहीं बल्कि इनाम है।'

बता दें अब बोर्ड की तरफ से सीजन के 75% मैच खेलने वाले खिलाड़ियों को एक टेस्ट खेलने पर मैच फीस के रूप में 45 लाख रुपए मिलेंगे। वहीं 50% से 74% मैच खेलने वाले खिलाड़ियों को 30 लाख मिलेंगे। यह मैच फीस सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट के अलावा मिलेगी। बीसीसीआई के इस फैसले के बाद अब आईपीएल कि तरह टेस्ट क्रिकेट में भी खिलड़ियों पर जमकर पैसा बरसेगा।

बोर्ड ने श्रेयस अय्यर और ईशान किशन पर डोमेस्टिक क्रिकेट की अनदेखी करने की वजह से एक्शन लिया था और 2023-24 के सेंट्रल कॉन्ट्रेक्ट से हटा दिया था। इसके बाद से ही खबरें आ रही थीं कि बोर्ड डोमेस्टिक क्रिकेट और टेस्ट को बचाने के लिए इस तरह की योजना लेकर आ सकता है।