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IPL 2025: मुंबई के खिलाफ क्लासेन के ‘ब्लंडर’ पर भड़के वरुण चक्रवर्ती, कहा – विकेटकीपर की गलती की सजा बॉलर क्यों भुगते?

वरुण चक्रवर्ती ने इस नियम पर अपनी असहमति जताते हुए कहा है कि इस तरह के मामलों में गेंदबाज़ को सज़ा देना उचित नहीं है, क्योंकि गलती पूरी तरह विकेटकीपर की होती है।

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भारत

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Siddharth Rai

Apr 18, 2025

Varun Chakaravarthy reacts on Henrich Klassen Controversy: मुंबई इंडियंस (MI) और सनराइजर्स हैदराबाद (SRH) के बीच खेले गए मुकाबले में एक विवादास्पद घटना ने सभी का ध्यान खींचा। हैदराबाद के विकेटकीपर हेनरिक क्लासेन की एक गलती ने सोशल मीडिया पर हलचल मचा दी है। अब कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) के स्पिनर वरुण चक्रवर्ती ने इस मामले पर अपनी कड़ी प्रतिक्रिया दी है और आईसीसी के नियम को लेकर सवाल खड़े किए हैं।

क्या था पूरा मामला?

मुंबई इंडियंस की पारी के 7वें ओवर में जीशान अंसारी की गेंद पर बल्लेबाज़ रयान रिकेल्टन ने शॉट खेला, जो सीधे कप्तान पैट कमिंस के हाथों में गया। अंपायर ने उन्हें कैच आउट करार दिया, लेकिन थर्ड अंपायर ने वीडियो रीप्ले के आधार पर फैसला बदल दिया। रीप्ले में साफ दिखा कि जब गेंद बल्ले से टकराई, तब विकेटकीपर हेनरिक क्लासेन के दस्ताने स्टंप्स की लाइन से आगे थे। आईसीसी के नियम 27.3.1 के अनुसार, यदि विकेटकीपर स्टंप्स के आगे गेंद को पकड़ता है, तो वह नो-बॉल मानी जाती है। इसी आधार पर इसे नो-बॉल करार दिया गया, रिकेल्टन को दोबारा बल्लेबाज़ी का मौका मिला और अगली गेंद फ्री हिट भी दी गई।

वरुण चक्रवर्ती का विरोध

केकेआर के गेंदबाज़ वरुण चक्रवर्ती ने इस फैसले पर नाराज़गी जताते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा:, 'अगर कीपर के दस्ताने स्टंप के सामने आ जाते हैं, तो यह डेड बॉल होनी चाहिए और कीपर को चेतावनी दी जानी चाहिए ताकि वह दोबारा ऐसा न करे! नो बॉल और फ्री हिट क्यों? इसमें गेंदबाज़ की क्या गलती है? इस पर बहुत सोच रहा हूं! आप सब क्या सोचते हैं?" वरुण का मानना है कि इस तरह की घटना में गेंदबाज़ को सज़ा देना उचित नहीं है क्योंकि गलती विकेटकीपर की होती है।

क्या कहता है नियम?

आईसीसी नियम 27.3.1 के मुताबिक, यदि विकेटकीपर गेंद को स्टंप्स के सामने या उनकी सीध में पकड़ता है, तो अंपायर नो-बॉल का संकेत देता है, भले ही गेंद कीपर तक आए या नहीं। क्लासेन के दस्ताने नियमों का उल्लंघन कर रहे थे, इसलिए यह फैसला नियमों के अनुसार सही माना गया।