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358 रनों की युवराज की वो ‘धागा खोल’ पारी, जिसका धोनी ने अपनी फ़िल्म में किया था जिक्र

महेंद्र सिंह धोनी की फिल्म में एक डायलॉग था। 'फिर आया युवराज सिंह और धागा खोल दिया।' इस डायलॉग के पीछे युवराज सिंह की 358 रनों की एक ऐसी पारी है। जिसे आज तक हर कोई याद करता है।

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युवराज सिंह

MS dhoni biopic Yuvraj Singh innings: पूर्व भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी की बायोपिक ' 'एमएस धोनी द अनटोल्ड स्टोरी' सभी ने देखी है। इस फिल्म में एक डायलॉग था, 'फिर आया युवराज सिंह और धागा खोल दिया।' यह डायलॉग फिल्म में धोनी का किरदार निभा रहे सुशांत सिंह राजपूत ने एक घरेलू क्रिकेट मैच की कहानी सुनाते हुए मारा था। आज हम आपको उसकी मैच के बारे में बताने जा रहे हैं। उस मैच में पूर्व दिग्गज भारतीय खब्बू बल्लेबाज युवराज सिंह ने तेहरा शतक लगाया था।

19 दिसंबर 1999 को कूच बिहार ट्रॉफी का फाइनल मुक़ाबला जमशेदपुर में बिहार और पंजाब के बीच खेला जा रहा था। इस मैच में बिहार की टीम पहले बल्लेबाजी करने उतरी और मात्र 357 रन बनाकर ऑल आउट हो गई। जवाब में बल्लेबाजी करने आई पंजाब की शुरुआत अच्छी रही और 60 रन पर पहला विकेट गिरा। इसके बाद फ़र्स्ट डाउन बल्लेबाजी करने उनके कप्तान युवराज सिंह आए और फिर उनकी इस पारी का इतिहास गवाह है।

पंजाब का दिन का खेल खत्म होने तक मात्र एक विकेट ही गिरा और टीम का स्कोर 108 रन था। तीसरे दिन का खेल शुरू हुआ और पंजाब के बल्लेबाज रन बनाते चले गए। दिन का खेल खत्म होने तक पंजाब का स्कोर 431 पर 2 विकेट था। युवराज सिंह डबल सेंचुरी बना कर खेल रहे थे।

अब आया आखिरी दिन और युवराज ने अपना असली रंग दिखाया। उन्होंने बिहार के गेंदबाजों को इतना मारा कि 'धागा खोल दिया'। दिन खत्म होने पर पंजाब का टोटल स्कोर 839 रन था। युवराज सिंह ने अकेले ही 358 रन बनाए थे। उनका स्कोर बिहार के टोटल से एक रन ज़्यादा था। इस मैच में युवराज सिंह ने कुल 579 मिनट तक बल्लेबाजी की और 404 गेंदें खेलीं। जिसमें 40 चौके और 6 सिक्स लगाए। युवराज ने तीसरे विकेट के लिए महाजन के साथ 341 रनों कि साझेदारी की। महाजन ने उस दिन अपनी डबल सेंचुरी पूरी की और 204 रन बनाए।

धागा खोल दिया का मतलब -
दरअसल क्रिकेट की गेंद चमड़े के दो पीस या 4 पीस से बनी होती है। इन पीसों को एक साथ बांधने के लिए धागे से सिला जाता है। जब गेंद पर ज्यादा प्रहार होता है तो गेंद धीरे-धीरे ढीली हो जाती है और उकसे धागे खुल जाते हैं। उस दिन युवराज ने कुछ इसी तरह बल्लेबाजी की थी।