
Aditya Murder Case
गया। बिहार के आदित्य सचदेव हत्याकांड के मामले में जेडीयू की पूर्व एमएलसी मनोरमा देवी के बेटे को दोषी करार दिया गया है। हालांकि सजा का ऐलान 6 सितंबर को किया जाएगा। फैसले को लेकर गया की अदालत में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। 7 मई 2016 को बोधगया से गया लौटने वक्त रोडरेज के दौरान आदित्य की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। आदित्य के साथ उसके चार दोस्त भी कार में थे। हत्या का आरोप जेडीयू की विधान परिषद सदस्य मनोरमा यादव के बेटे रॉकी और उसके बॉडीगार्ड पर लगा था। घटना के बाद पार्टी ने मनोरमा को सस्पेंड कर दिया था।
क्या था मामला
आरोप के मुताबिक, आदित्य ने रॉकी की लैंड रोवर गाड़ी को आगे ज्यादा ट्रैफिक होने की वजह से साइड नहीं दी थी। नाराज रॉकी ने कुछ आगे जाकर आदित्य की गाड़ी को ओवरटेक किया। दोनों के बीच बहस और फिर मारपीट हुई। इसके बाद कथित तौर पर रॉकी ने आदित्य को गोली मार दी। गोली आदित्य के सिर में लगी थी। उसकी मौके पर ही मौत हो गई थी।
घटना के वक्त कार में थे 4 लोग सवार
घटना के वक्त आदित्य अपने दोस्त नासिर हुसैन, मो कैफी, आयुष अग्रवाल और अंकित अग्रवाल के साथ गया से एक पार्टी के बाद लौट रहा था। रॉकी यादव को 11 मई 2016 को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था। वहीं फैसले की घड़ी नजदीक आने को लेकर आदित्य सचदेव की मां ने उम्मीद जताई है कि अदालत से उनको इंसाफ मिलेगा।
तय सीमा से 5 दिन पहले सुनाया फैसला
गुरुवार को इस मामले में अतिरिक्त जिला सत्र न्यायाधीश (एडीजे) सच्चिदानंद सिंह ने फैसला सुनाया। आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने इस केस में फैसला सुनाने की तय सीमा 5 सितंबर रखी थी। तय सीमा से पांच दिन पहले ही कोर्ट ने फैसला सुना दिया। इस केस में उस वक्त अहम मोड़ आ गया था, जब पटना हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस इकबाल अहमद अंसारी के द्वारा रॉकी यादव को दी गई जमानत को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी थी। पटना हाईकोर्ट के फैसले को बिहार सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।
गवाहों ने बदल लिए थे बयान
इस केस के ट्रायल के दौरान आदित्य के दोस्त घटना के वक्त चश्मदीद थे, लेकिन चारों दोस्तों और घटना के वक्त मौके पर मौजूद एक पुलिस कॉन्सटेबल ने दबाव में आकर अपने बयान बदल लिए थे। इन सभी चश्मदीदों ने रॉकी यादव को पहचानने से इनकार कर दिया था। ऐसे में गवाहों के बयान के बयान से पलट जाने से केस में नया मोड़ आ गया था। इसके बाद काफी कुछ सबूत जैसे कि रॉकी यादव की पिस्टल से चली गोली और घटना के वक्त उसके मोबाइल फोन की लोकेशन और फॉरेंसिक रिपोर्ट पर मामला टिक गया था। केस के निपटारे के कुछ हफ्ते पहले ही एडीजे एसपी मिश्रा की अदालत से ये केस एडीजे सच्चिदानंद की अदालत में ट्रांसफर कर दिया गया था।
Updated on:
31 Aug 2017 05:32 pm
Published on:
31 Aug 2017 04:04 pm
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