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आठवीं पास ‘PhD’ ने 2500 लोगों को लगाया चूना, क्रिप्टोकरंसी के नाम पर ठगे 500 करोड़

ढाई हजार लोगों को मल्टीलेवल मार्केटिंग फॉर्मूले से झांसे में लिया और 500 करोड़ रुपए ठग लिए।

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आठवीं पास 'PhD' ने 2500 लोगों को लगाया चूना, क्रिप्टोकरंसी के नाम पर ठगे 500 करोड़

मुंबई। महाराष्ट्र में ठाणे पुलिस की क्राइम ब्रांच ने एक ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया है जिसने ढाई हजार लोगों को करीब पांच सौ करोड़ की चपत लगा दी। क्राइम ब्रांच के हत्थे चढ़ा यह गिरोह 'फ्लिस्टोन' नाम की कंपनी चलाता था। इस ठगी के लिए मनी ट्रेड कॉइन नाम की एक फर्जी करंसी में निवेश का झांसा दिया गया था। कंपनी के दफ्तर ठाणे के घोडबंदर रोड और मुंबई के विक्रोली इलाके में हैं। एक दफ्तर दुबई में भी होने की बात सामने आई है। दफ्तरों पर छापेमारी में पुलिस ने 53 लैपटॉप, बड़ी संख्या में फर्जी कागज पत्र, सरकारी, गैर सरकारी मुहरें, मोबाइल फोन, फर्जी दस्तावेज, फर्जी विजिटिंग कार्ड और फर्जी कॉइन सहित बड़ी मात्रा में सामान जब्त किया है।

...ऐसे दिया अंजाम

प्राप्त जानकारी के मुताबिक ठगी के लिए 'फ्लिस्टोन' कंपनी ने कुल 105 करोड़ सिक्के तैयार किए थे। तीन डॉलर कीमत वाले इन सिक्कों को छह हजार डॉलर तक में बेचा गया। ढाई हजार लोगों को मल्टीलेवल मार्केटिंग फॉर्मूले से झांसे में लिया और 500 करोड़ रुपए ठग लिए।

सरकार का अधिकृत प्रतिनिधि बताता था खुद को

लोगों को प्रभावित करने के लिए फोर्ब्स जैसी बड़ी पत्रिकाओं में अपने इंटरव्यू और फोटो दिखाता था। इसके अलावा उसने कई प्रतिष्ठित हस्तियों के साथ अपनी फोटो भी छपवा रखी थी। इसके अलावा उसने फर्जी सरकारी विजिटिंग कार्ड भी छपवा रखे थे। कंपनी से जुड़े लोगों ने खुद को भारत सरकार के वित्त मंत्रालय का अधिकृत प्रतिनिधि बताया था।

ये हैं गिरोह के गुर्गे

- अमित लखन पालः यह कंपनी का मास्टरमाइंड है। आठवीं पास है लेकिन उसने फर्जी तरीकों से ऑकलैंड यूनिवर्सिटी से डॉक्टरेट की डिग्री बनवा रखी है। प्राप्त जानकारी के मुताबिक अमित फिलहाल दुबई में है। अमित ने 13 फर्जी कंपनियां बना रखी हैं।
- हाफिज काजीः सॉफ्टवेयर बनाने से लेकर तमाम तकनीकी सहायता करने वाला यह शख्स पनवेल के कॉलेज से कंप्यूटर इंजीनियरिंग में डिप्लोमा कर चुका है।
- सचिन शैलारः यह कंपनी के लिए रुपए जुटाने समेत फाइनेंस का पूरा काम देखता था।
- इनके अलावा ठाणे पुलिस में असिस्टेंट इंस्पेक्टर रैंक के एक अधिकारी के भी शामिल होने की बात सामने आई है। फिलहाल पुलिस इसकी छानबीन कर रही है।

...ऐसे सामने आई बात

पूरा मामला तब सामने आया जब दिल्ली के एक कारोबारी को ठगी का अहसास हुआ। प्राप्त जानकारी के मुताबिक प्रवीण अग्रवाल नाम के एक शख्स ने इस कंपनी में पौने दो करोड़ रुपए का निवेश किया था। बाद में जब एक भी पैसा वापस नहीं मिला तो उन्होंने पुलिस को जानकारी दी।

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