31 जनवरी 2026,

शनिवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

लखन भईया फर्जी मुठभेड़ मामले 11 पुलिस वालों की स्थगित

अदालत ने आदेश में कहा कि उनकी फिर से की गई कोई भी गलत हरकत उन्हें फिर से जेल पहुंचा सकती 

2 min read
Google source verification

image

Puneet Parashar

Dec 03, 2015

Unique Order of Court

Unique Order of Court

मुंबई। महाराष्ट्र सरकार ने साल 2006 में हुए लखन भैया फर्जी मुठभेड़ मामले में कुल 21 लोग दोषी ठहराये गये थे। इन 21 लोगों में से 13 पुलिस वाले थे। इनमें से दोषी 11 पुलिस वालों की सजा 6 महीने के लिए स्थगित कर दी है। गृह विभाग के आदेश में 6 महीने के लिए मुक्त किये गए दोषियों के लिए लिखा गया है कि इस दौरान वे मामले से जुड़े पीड़ित परिवार या गवाहों से संपर्क नहीं करेंगे, साथ ही उन्हें अपना पासपोर्ट भी जमा करना पड़ेगा।

आदेश में कहा गया है कि अगर वह धर्म परिवर्तन करते हैं तो पहले सरकार से अनुमति लेनी होगी, साथ ही साथ उनकी कोई भी गलत हरकत उन्हें फिर से जेल पहुंचा सकती है। इसमें ये स्पष्ट किया गया है कि मामला अभी हाई कोर्ट में लंबित है और अगर वहां से सजा होती है तो भी उन्हें वापस जेल जाना होगा। मामले में लखन भैया के भाई रामप्रसाद गुप्ता ने सरकार के इस फैसले पर खेद जताते हुए अदालत में चुनौती देने की बात कही है।

यह हैं पुलिस वालों के नाम-
जिन दोषियों की सज़ा स्थगित की गई है उनके नाम इस प्रकार हैं - दिलीप सीताराम पालांडे, नितिन गोरखनाथ सरतापे, गणेश अंकुश हारपुडे, आनंद बालाजी पाताडे, प्रकाश गणपत कदम, देवीदास गंगाराम सकपाल, पांडुरंग गणपत कोकम, रत्नाकर गौतम कांबले, संदीप हेमराज सरदार, तानाजी भाऊसाहेब देसाई, विनायक बालासाहेब शिंदे।


गौरतलब है कि 11 नवंबर 2006 की शाम को पुलिस ने दावा किया था कि अंधेरी के नाना नानी पार्क के पास उन्होंने खूंखार गुंडे को मुठभेड़ में मार गिराया। लेकिन दूसरे दिन ही लखन के भाई राम प्रसाद गुप्ता ने प्रेस के सामने दावा किया कि उनका भाई मुठभेड़ में नहीं मरा है बल्कि उसे नवी मुंबई से अगवाकर पहले मुंबई ले जाया गया बाद में हत्या कर एनकाउंटर की फर्जी कहानी गढ़ी गई।

ये भी पढ़ें

image
Story Loader