जो लोग सक्षम नहीं है वे लोग अन्य किसी व्यक्ति के आने का इंतजार करते हैं, ताकि जो सेनेटाइजर लाएगा उसके सेनेटाइजर का उपयोग कर हाथ धोया जा सके और उनके बच्चे को इंजेक्शन लग सके।
डबरा. इन दिनों कोरोना को लेकर डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ कर्मवीर की भूमिका में है, लेकिन जब यह पता चलता है कि अन्य स्टाफ की वजह से लोग परेशान हो रहे हैं तो यह गंभीर विषय है। सिविल अस्पताल में टीका लगाने के लिए बच्चों के साथ आए परिजनों से बाहर से सेनेटाइजर मंगाया जाता है, तब उनके बच्चों को इंजेक्शन लगता है। स्टाफ का कहना है कि सिविल अस्पताल में सेनेटाइजर की व्यवस्था नहीं है इसलिए बाजार से सेनेटाइजर मंगवा रहे हैं।
जो लोग सक्षम नहीं है वे लोग अन्य किसी व्यक्ति के आने का इंतजार करते हैं, ताकि जो सेनेटाइजर लाएगा उसके सेनेटाइजर का उपयोग कर हाथ धोया जा सके और उनके बच्चे को इंजेक्शन लग सके।
अंकित गुप्ता अपनी बेटी ओजस्वी का टीकाकरण कराने सिविल अस्पताल गए थे, जहां पदस्थ नर्सिंग स्टाफ ने इंजेक्शन लगाने के पहले बाजार से सेनेटाइजर लाने की बात कही। सेनेटाइनजर लाने के बाद ही उनकी बेटी को टीका लगाया गया। उसने बताया कि अस्पताल में अन्य अभिभावक भी बैठे हुए थे जो सेनेटाइजर लाने में सक्षम नहीं थे।
इस संबंध में सीबीएमओ डॉ. एसके सोलंकी का कहना है कि जब ये मामला उनके संज्ञान में आया तो तत्काल स्टाफ को बुलाकर समझाया कि अतिरिक्त सेनेटाइजर की व्यवस्था करा दी गई है।