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दमोह में यहां 11वीं शताब्दी के शिवलिंग के होते हैं दर्शन

Savan Somvar 2023 950 ईसवी से बना है कोड़ल का शिवमंदिर, लोगों का आस्था का है केंद्र,11वीं शताब्दी का है शिवमंदिर, सावन में लग रहा मेला,दमोह में यहां 11वीं शताब्दी के शिवलिंग के होते हैं दर्शन

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दमोह

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Samved Jain

Jul 16, 2023

दमोह में यहां 11वीं शताब्दी के शिवलिंग के होते हैं दर्शन

दमोह में यहां 11वीं शताब्दी के शिवलिंग के होते हैं दर्शन

सावन का महीना चल रहा है और देशभर के शिव मंदिरों में आस्था का सैलाब उमड़ता दिखाई दे रहा है। तेन्दूखेड़ा ब्लॉक के एक छोटे से गांव कोड़ल में प्रसिद्ध शिव मंदिर में सोमवार को भक्तों की भीड़ उमड़ेगी। कोड़ल गांव में बना शिव मंदिर काफी प्राचीन है, यहां सावन के महीने में भारी संख्या में भक्तों की भीड़ उमड़ती है। जहां नगर व क्षेत्र के लोग पहुंच रहे है।

तेंदूखेड़ा से तारादेही सड़क मार्ग पर ग्राम पंचायत दरौली से लगभग 2 किमी दूरी पर स्थित ग्राम पंचायत कोड़ल स्थित है। जहां स्थित है कल्चुरी कालीन समय में बनवाया गया प्राचीन शिवमंदिर सांस्कृतिक व पुरातत्व की धरोहर है। वहीं मंदिर के चारों ओर अद्धत कलाकृतियों की नक्काशी पत्थरों पर की गई हैं।
खजुराहो की तरह कलाकृतियों का यह मंदिर 950ईसवी में कल्चुरी शासकों द्वारा बनवाया गया था। जिसकी देखरेख वर्तमान में पुरातत्व विभाग के जिम्मे हैं। शासकों द्वारा मंदिर के समय समय पर धुलाई की जाती है। साथ ही मंदिर की पूर्ण सुरक्षा के लिए एक स्मारक परिसर व दो दैनिक कर्मचारी भी नियुक्त है।

- ऐसा है मंदिर का इतिहास
1984 तक इस जगह के आसपास मेला भी भरता था, जिसमें काफी भीड़ रहती थी। सन 1984 के बाद यह व्यवस्था बंद हो गई। बाद में सन 1925 से शासन ने इसको अपने अधिपत्य में लिया था। मंदिर के बाहर सुंदर कलाकृतियां पत्थरों पर बनी हुई हैं। यहां पर श्रावण मास में भगवान के दर्शनों के लिए अपार जनसमूह एकत्रित होता है। आसपास के ग्रामों से लेकर सागर, जबलपुर, देवरी, पाटन, महाराजपुर, दमोह, रहली, तेन्दूखेड़ा, जबेरा के भक्तगण भगवान की आराधना करने के लिए कोड़ल पहुंचते है। मंदिर परिसर के अंदर एक बड़ा मठ भी बना हुआ है। पूर्व में इस मठ का कुछ हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया था। जिस हिस्से का शासन द्वारा जीर्णोद्धार कराया गया है। ग्राम के बुजुर्गों के द्वारा बताया गया है कि इस मठ में ब्राह्मणों को शिक्षा दी जाती थी। मंदिर के अंदर भगवान शिव की बड़ी पिंडी विराजमान हैं मंदिर के चारों ओर सुंदर कलाकृतियां पत्थरों पर की गई है।

- एक बार हुआ महोत्सव
कोड़ल के शिव मंदिर में पूर्व मंत्री रत्नेश सॉलोमन द्वारा एक बार एक दिन का कोड़ल महोत्सव आयोजित कराया गया था। इसके बाद कभी भी इस प्रकार का महोत्सव नहीं कराया गया है। कुंजीलाल चौकसे ने बताया कि कल्चुरी कालीन का यह शिवमंदिर आसपास के क्षेत्र वासियों के लिए आस्था का केंद्र बिदु है

-पश्चिम दिशा की ओर है मुख्य द्वार
सामान्यत: किसी भी मंदिर का मुख्य प्रवेश द्वार पूर्व दिशा की ओर होता है, लेकिन कोड़ल शिवमंदिर का मुख्य प्रवेश द्वार पश्चिम दिशा की ओर है जो अपने आप मे अद्भुत है। पूरा मंदिर पत्थरों का बना हुआ है और मंदिर की बाहरी दीवार पर नवग्रह माता पार्वती और भगवान शिव की प्रतिमा बनी हुई हैं।

- कोहलेश्वर महादेव के नाम भी जानते हैं भक्त
कोड़ल गांव निवासी कुंजीलाल चौकसे ने बताया कि यहां भगवान शिव की प्रतिमा कहा से आई इसके बारे में उनके पूर्वजों तक को कोई जानकारी नहीं है। मंदिर को कोहलेश्वर महादेव मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। यहां की खासियत यह है कि शिवलिंग के पास से एक गुफा निकली है जो तारादेही के समीप गोहदर के पास निकलती है। सावन माह का दूसरा सोमवार है जहाँ सैकड़ों श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शनों के लिए आएंगे।