
दमोह. जिले में खराब आए परीक्षा परिणाम के बाद सुधार की तैयारी में जिला प्रशासन और विभाग है, लेकिन असल में यह प्रयास कितने कारगर है, पत्रिका पड़ताल में समझ आते है। जिले में 7 प्रतिशत से अधिक स्कूल ऐसे हैं, जिनमें शिक्षक नहीं है और 12 प्रतिशत स्कूल एक ही शिक्षक के भरोसे हैं। यही वजह है कि स्कूल खुले एक पखवाड़ा बीतने को हैं, कई स्कूलों में अब तक पढ़ाई भी शुरू नहीं हो सकी है। जिसका कारण अतिथि शिक्षकों का की अब तक नियुक्ति नहीं होना है। जिनके भरोसे पूरी शिक्षा व्यवस्था कायम है। इधर, हाइ और हायर सेकंडरी स्कूलों में भी शिक्षकों की कमी बनी हुई है। जिसका विभाग के पास कोई तोड़ नहीं हैं।
जानकारी के अनुसार जिले में 42 प्राइमरी, मिडिल और इपीएस स्कूल है, जिसमें एक भी शिक्षक की पदस्थापना नहीं है। 2023-24 सत्र में तो ये स्कूल अतिथियों के भरोसे चल गए, लेकिन इस बार अभी तक इस स्कूलों में पढ़ाई भी शुरू नहीं हो सकी है। जिसका कारण स्कूलों में अतिथि शिक्षकों का भी इस बार अभी तक नहीं होना है। इसके अलावा 168 स्कूल ऐसे है, जिनमें सिर्फ एक ही शिक्षक पदस्थ है। ऐसे में एक शिक्षक के भरोसे ही सभी कक्षाएं संचालित हो रही हैं। जिससे पढ़ाई कैसे नए नियमों के आधार पर हो पा रही होगी, समझना संभव है।
हायर सेकंडरी में भी नहीं विषय विशेषज्ञ
शिक्षक जिले में 3 हजार से अधिक शिक्षकों की कमी है। प्राइमरी, मिडिल के अलावा हाइ और हायर सेकंडरी स्कूलों में भी शिक्षकों की बेजा कमी है। हायर सेकंडरी स्कूलों में विशष विशेषज्ञ शिक्षक नहीं है। जिससे इन स्कूलों में अब तक ये कक्षाएं शुरू नहीं हो सकी है। कारण स्पष्ट है कि यहां अभी तक अतिथि शिक्षक नहीं रखे गए हैं। इतना ही नहीं कई प्राइमरी और मिडिल के शिक्षक भी हाइ और हायर सेकंडरी में सेवाएं दे रहे हैं, इसके बाद भी शैक्षणिक व्यवस्था में सुधार हो पाना मुश्किल नजर आ रहा है। शिक्षकों के नहीं होने की स्थिति में बच्चों की संख्या भी सरकारी स्कूलों में कम दर्ज हो रही है।
आरटीई के नियम भी फेल
जिले में शिक्षकों की संख्या 6500 के करीब है। जिसमें सभी संवर्गों के शिक्षक शामिल है। इसके अलावा करीब 2 हजार अतिथि शिक्षक भी बीते वर्ष सेवाएं देते आए हैं। जबकि करीब 1 हजार पद अटैचमेंट, अन्य विभागों में सेवाएं देने के कारण खाली रहे है। ऐसे में मिडिल स्कूल तक जो आरटीई के नियम अनुसार शिक्षक व्यवस्था होनी चाहिए, वह फेल नजर आती है। 210 स्कूलों में जहां शिक्षक नहीं और एक-एक शिक्षक हैं, वहीं अधिकांश स्कूलों में बच्चों की संख्या के आधार पर शिक्षक नहीं है। ऐसे में प्रॉपर शैक्षणिक कार्य नहीं हो पा रहा हैं। वहीं नियमों में सख्ती के बाद भी इनसे कोई बदलाव नजर नहीं आ रहे हैं।
- फैक्ट फाइल
6500 करीब जिले में सभी संवर्गों के शिक्षक
3000 करीब शिक्षकों की जिले में जरूरत
1900 करीब अतिथि शिक्षकों ने बीते वर्ष दी सेवाएं
500 करीब शिक्षक दे रहे विभाग में सेवाएं
42 स्कूलों में नहीं एक भी शिक्षक
168 स्कूल सिर्फ एक ही शिक्षक के भरोसे
0 अतिथि शिक्षकों की अब तक हुई है भर्ती
1694 स्कूल जिले में शासकीय संचालित
वर्जन
नए शैक्षणिक सत्र में पढ़ाई के साथ-साथ अन्य गतिविधियों पर जोर देने के निर्देश सभी प्राचार्यों और शिक्षकों को दिए गए हैं। अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति में देरी होने के कारण कुछ स्कूलों में संबंधित विषयों की पढ़ाई शुरू नहीं हो सकी है, तो पता करता हूं। शिक्षकों की कमीं के संबंध में उच्चाधिकारियों को पत्र व्यवहार किए गए हैं।
एसके नेमा, डीइओ दमोह
Published on:
27 Jun 2024 07:08 pm
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