
बालक के शव से लिपटकर बिलख रही मां
दमोह. जिला अस्पताल में व्याप्त अराजकता की भेंट चढऩे से मंगलवार को एक ८ वर्षीय मासूम बालक की मौत हो गई। बताया गया है कि बालक बुखार से पीडि़त था और उसे जिला अस्पताल लाने पर खून की कमाई बताई गई थी। समय रहते बालक को न खून चढ़ाया गया और न उपचार के दौरान ऑक्सीजन लगाई गई। नतीजतन २४ घंटे जिला अस्पताल में रहने के बाद बालक ने दो बार अपनी मां को मम्मी-मम्मी कहकर पुकारा और मौत की नींद सो गया। हैरानी वाली बात इस मामले में यह भी सामने आई है कि बालक के परिजनों से ब्लड उपलब्ध कराए जाने के नाम पर करीब 1100 रुपए ले लिए गए और ब्लड का इंतजाम नहीं किया गया।
ये है मामला
जिला मुख्यालय से करीब 10 किलोमीटर दूर भदौली गांव निवासी पवन पिता निजाम अहिरवार उम्र 8 साल को टाइफाइड की शिकायत होने के कारण सोमवार की शाम जिला अस्पताल लाया गया था। अस्पताल में भर्ती होने के बाद खून की कमी बताई गई और परिजनों को खून का इंतजाम करने के लिए कह दिया गया। मंगलवार की दोपहर करीब १२ बजे परिजनों से 1100 रुपए जांच पर्ची कांटने वाले कर्मचारी द्वारा ब्लड का इंतजाम करने के नाम पर ले लिए गए। लेकिन ऐन मौके पर ब्लड उपलब्ध नहीं हो सकेगा यह कह दिया गया। दोपहर करीब ३ बजे अचानक पवन की स्थिति बिगड़ गई और उसे सांस लेने में परेशानी होने लगी। इस दौरान बच्चा वार्ड में मौजूद नर्स स्टॉफ द्वारा ऑक्सीजन का इंतजाम नहीं किया गया। कुछ ही मिनटों बाद बच्चे की मौत हो गई और नर्स स्टॉफ द्वारा परिजनों के लिए अस्पताल के काउंटर पर जाने के लिए कह दिया गया।
परिजनों को नहीं दी शव की जानकारी
परिजनों को नर्स स्टॉफ द्वारा बच्चे की मौत की जानकारी तो दे दी गई थी, लेकिन शव नहीं सौंपा गया था। परिजनों को गेट के पास बरामदे में पहुंचने के लिए कह दिया गया था। परिजनों को यह नहीं बताया गया कि बच्चे के शव को कहां रखा गया है और इधर वार्ड कर्मचारी द्वारा शव लाकर अस्पताल के रुम नंबर ०३ में रख दिया गया। परिजनों को शव रुम रखे जाने की जानकारी तब पता चली जब पत्रिका ने बच्चे के शव की अस्पताल में तलाश की तो जिला अस्पताल चौकी के सिपाही ने रुम में ले जाकर शव दिखाया, लेकिन इसके पहले अस्पताल कर्मचारी और सिपाही द्वारा भी परिजनों को शव कहां है यह नहीं बताया गया था। पूछताछ करने पर यह बात सामने आई कि अस्पताल प्रबंधन यह चाह रहा था कि घटना की जानकारी सार्वजनिक न हो पाए और परिजनों को किसी तरह समझाबुझा कर बगैर कार्रवाई के शव लेकर वापस घर भेज दिया जाए। लेकिन प्रबंधन की यह मंशा पूरी नहीं हो सकी और परिजनों ने चीख चीखकर अस्पताल के डॉक्टर, नर्स व अन्य कर्मचारियों को मासूम की मौत के लिए जिम्मेदार ठहरा दिया।
आखिरी शब्दों में मासूम ने मां को पुकारा
बालक के शव से लिपटकर बिलख रही मां ने बताया कि उसके बेटे ने मौत की नींद में पहुंचने से पहले दो बार 'मम्मी-मम्मीÓ कहा और आंखों से आंसू बहने लगे, देखते ही देखते बेटे ने आंखें बंद कर लीं। मां ने आरोप लगाया कि मौत के कुछ मिनट पहले नर्स द्वारा एक इंजेक्शन लगाया गया था। इंजेक्शन लगाते ही तकलीफ बढ़ गई थी।
शाम 06 बजे तक सीएस मामले से अंजान रहीं
जिला अस्पताल में घटित इस घटना की जानकारी सिविल सर्जन डॉ. ममता तिमौरी को शाम ०६ बजे तक नहीं थी। 6.18 बजे डॉ. ममता तिमौरी ने पत्रिका से कहा कि मैं अभी मीटिंग से लौटी हूं, मुझे कुछ मिनट पहले फोन पर सूचना मिली है कि किसी बच्चे की मौत हुई है। मैंने डॉ. दिवाकर पटैल से इस संबंध में बात की और यह जानकारी मिली है कि डॉ. आर्या ड्यूटी पर थे। अभी मैं अस्पताल जाउंगी और फाइल देखकर ही क्या मामला है यह बात पाउंगी। रही ब्लड के नाम पर पैसे लेने की बात तो हो सकता है कि उसकी पर्ची कांटी गई हो। विदित हो कि घटना के संबंध में अस्पताल आरएमओ डॉ. दिवाकर पटैल से भी बात करनी चाही लेकिन फोन रिसीव नहीं हुआ।
Published on:
17 Jul 2019 04:04 am
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